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श्राइन बोर्ड की लापरवाही से मर रहे शिवभक्त

Firozpur

Updated Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
फिरोजपुर। श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान शिव भक्तों के मरने का कारण बालटाल व पहलगाम के जरिए पवित्र गुफा तक जाने वाला रास्ता बहुत छोटा व तंग है, जिस कारण यात्री घोड़ों व पैर फिसलने से गहरी खाई में गिरने से मर रहे हैं। इसके अलावा बस में जत्थे ले जाने वाले ट्रेवल एजेंट यात्रियों का बिना मेडिकल करवाए यात्रा करवा रहे हैं। यही नहीं कई जम्मू-कश्मीर बैंक भी ट्रेवल एजेंट के साथ मिलकर उन्हें एक सौ व दो सौ लोगों का एक साथ पंजीकरण कर रहे हैं। ऐसे एजेंटों ने फार्म पर किसी और व्यक्ति की फोटो लगाई होती है, जबकि यात्रा में जाने वाले व्यक्ति और होते हैं।
बालटाल में लगे लंगर समितियों के कई नेताओं व सदस्यों ने बताया कि शिव भक्तों की संख्या इतनी ज्यादा है कि बालटाल से गुफा तक जाने वाले रास्ते में यात्रियों के जाम लग रहे हैं। कई यात्री जाम में फंस जाते हैं और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। जिस कारण उनकी मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि अब तक 48 शिव भक्त यात्रा के दौरान मर चुके हैं। इनमें से 16 यात्री घोड़ों से गिर कर मरे हैं और एक यात्री पालकी से गिर कर मरा है। समितियों के नेताओं का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के जिला प्रशासन व श्राइन बोर्ड ने तंग रास्तों पर ग्रिल व रस्सी तक नहीं लगाई है।
इसके अलावा यात्रा के दौरान कमाई करने वाले ट्रेवल एजेंट किसी भी यात्री का मेडिकल नहीं करवा रहे, बल्कि आरएमपी को बीस से तीस रुपये देकर जाली मेडिकल बनाकर जम्मू-कश्मीर बैंक को दे रहे हैं। कई बैंक ऐसे एजेंटों को एक सौ से दो सौ पंजीकरण के फार्म एक साथ दे रहे हैं। नियम के मुताबिक तीन या चार व्यक्ति का पंजीकरण फार्म एक साथ दे सकते हैं। इसके अलावा यात्रा में कई यात्री बिना पंजीकरण के यात्रा कर रहे हैं। इससे बालटाल व पहलगाम में ज्यादा भीड़ हो रही है। जिस कारण यात्रियों को पहाड़ों में जाम लगने से दो से तीन घंटे बर्फ व बरसात में रुकना पड़ रहा है। इसी कारण यात्रियों की मौत हो रही है। बताते हैं कि पिछले साल करीब 105 शिव भक्तों की मौत हुई थी। जबकि 2009 में लगभग 45 और 2010 में 68 यात्रियों की मौत हुई थी।
सोमवार को एक और यात्री की मौत हुई, संख्या 48 पहुंची
फिरोजपुर। बालटाल में लगे लंगर समिति के एक नेता ने बताया कि सोमवार को भी घोड़े से गिर कर एक महिला यात्री की मौत हुई है। अब मरने वालों की संख्या 48 पहुंच गई। बताते हैं कि घोड़े वाले जल्दबाजी के कारण पहाड़ों के छोटे व तंग रास्ते से धक्का मारते हुए गुजरते हैं।
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