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लंगेआना ड्रेन से कहर का खतरा बरकरार

Bathinda

Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
फरीदकोट। जिला प्रशासन के पिछले वर्ष पैदा हुए बाढ़ जैसे हालातों से कोई सबक न लेने की वजह से मानसून की दस्तक से पहले फरीदकोट के किसानों को चिंता सताने लगी है। इस वर्ष भी जिले से गुजरती लंगेआना ड्रेन की आधी अधूरी साफ सफाई किसानों पर मुसीबत का कहर बरपा सकती है।
जिले के एक बड़े हिस्से के गंदे व बरसाती पानी की निकासी में सहायक लंगेआना ड्रेन की हालत देखकर नहीं लगता कि जिला प्रशासन ने बाढ़ जैसे हालात से निपटने की तैयारी कर रखी है। मोगा के वाघापूराना से जिले में प्रवेश करनी वाली यह ड्रेन गांव कोटसुखिया,नंगल,नत्थेवाला,भाणा,चहिल, फरीदकोट शहर,किलानौ,रत्तीरोड़ी से होकर जिला मुक्तसर की तरफ जाती है लेकिन आधी अधूरी साफ सफाई के कारण इसके आसपास बसे डेढ़ दर्जन गावों को पिछले वर्ष इसके ओवरफ्लो हुए पानी के कहर की याद आने लगी है। पिछले कई वर्षो से ही सफाई के नाम पर ड्रेनर्ज विभाग की तरफ से ड्रेन के सिर्फ दाहिने हिस्से को ही साफ किया जाता है जबकि बाएं हिस्से की गंदगी प्रशासन को मुंह चिढ़ा रही है। पता चला है कि इस वर्ष सरकार ने बारिश से पहले ड्रेनों की सफाई करवाने के लिए मांगे गए फंड का सिर्फ 25 प्रतिशत हिस्सा जारी किया है जिससे गांवों की छोटी संपर्क ड्रेनों को ही साफ करवाया जा रहा है। माई गोदडी निवासी किसान गुरमुख सिंह ने बताया कि उन्हें हर वर्ष ही लंगेआना ड्रेन से अपनी फसल को बचाने के लिए दिन रात पहरा देना पड़ता है। जुलाई 2010 के दौरान पहरा देते देते रेलवे ट्रैक पर सुस्ता रहे उनके भांजे समेत दो किसानों की मालगाड़ी के नीचे आने से मौत हो गई थी। किसान वजीर खां ने बताया कि पिछले वर्ष ड्रेन की वजह से उनकी चार एक़ड़ खड़ी नरमे की फसल खराब हो गई थी। उसके बाद हालात सामान्य होने के बाबजूद उस सीजन कोई फसल नहीं लग पाई और उन्हें मामूली सरकारी मुआवजे से ही गुजारा करना पड़ा। गांव नत्थेवाला के नंबरदार कर्णबीर सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष लंगेआना ड्रेन से अकेले उनके गांव में ही करीब 250 ऐकड़ फसल का नुक्सान हुआ था। इस वर्ष सफाई न होने की वजह से किसानों पर खतरे के बादल मंडरा रहे है। इस मामले में ड्रेनर्ज विभाग के कार्यकारी इंजीनियर गुरजीत सिंह ने दावा किया कि जरूरत से कम बजट आनेके बाबजूद लंगेआना ड्रेन समेत अन्य छोटी संपर्क ड्रेनों की सफाई करवाई जा रही है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानियों को सामना करना पड़े। साथ ही उन्होंने बताया कि ड्रेन के बाएं तरफ खेत होने की वजह से उस हिस्से की सफाई करने दिक्कत आती है और किसान भी सहयोग नहीं देते।
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