Breaking News in Hindi Thursday, May 28, 2015

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पदोन्नति से इनकार के बाद भी ले रहे वेतनमान का लाभ

ललितपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में एक सैकड़ा से अधिक शिक्षक पदोन्नति से इनकार करने के बाद भी चयन वेतनमान का लाभ पा रहे हैं। इस घालमेल में विभागीय अधिकारियों की मौन स्वीकृति शिक्षकों को नियम तोड़ने को प्रोत्साहित कर रही है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कार्रवाई की मांग करके इस मुद्दे को फिर से अफसरों की नजर में ला दिया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में दस वर्ष की संतोषजनक सेवा के पश्चात शिक्षकों को चयन वेतनमान का लाभ दिया जाता है। इसके अंतर्गत वेतन में खासी वृद्धि हो जाती है। लेकिन, शासनादेश के मुताबिक पदोन्नति के लाभ से इनकार करने वाले शिक्षकों को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता है। स्पष्ट शासनादेश के बावजूद विभाग में एक सैकड़ा से अधिक शिक्षकों ने पदोन्नति को तो ठुकरा दिया, लेकिन चयन वेतनमान का वे लगातार लाभ पा रहे हैं। हकीकत जानते हुए भी विभागीय अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसकी वजह से शासन को लाखों रुपये का लगातार चूना लगता रहा। जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के बाद एक शिक्षक नेता को चयन वेतनमान से वंचित करके विभाग ने कार्रवाई की और ऐसे शिक्षकों को सूचीबद्ध कराने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया। पदोन्नति से इनकार के बाद भी चयन वेतनमान का लाभ पाने वाले जखौरा ब्लाक में लगभग चालीस शिक्षक चिह्नित किए गए। वहीं, अन्य ब्लाकों में भी ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर ली गई। लेकिन, मामला शांत हो जाने के बाद यह सूची बेसिक शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं, बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी जखौरा ब्लाक के सूचीबद्ध शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। शनिवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ पदाधिकारियों ने पदोन्नति से इनकार करने के बाद भी चयन वेतनमान का लाभ पा रहे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र सौंपा। पत्र में लंबित वेतन अवशेष का भुगतान, भविष्य निधि पासबुक खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय पर उपलब्ध कराने, 2004 के बाद चयनित शिक्षकों की एनएससी का भुगतान सहित विभिन्न मांगे की गई हैं। शिक्षक नेता राजेश लिटौरिया व कैलाश नारायण तिवारी का कहना है कि शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर संघ आंदोलन को बाध्य हो जाएगा।

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