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आपकी सांसें बताएँगी किस काम में कब सफलता मिलेगी

बहुत लोगों को देखा होगा कि घर से बाहर निकलते या कोई काम शुरु करते वक्त अपनी दो उंगलियां नाक के पास ले जाते हैं, गहरी सांस लेते-छोड़ते और फिर आगे बढ़ते हैं। हाल तक अंधविश्वास मानी जाती रही इस विधि में कुछ दम दिखाई देने लगा है।

तिब्बत के आसपास और हिमालय की कंदराओं में योग ध्यान की विधियां और प्रभावों का अध्ययन करते घूमते रहे प्रो. एलन राइट ने इस विद्या का बारीकी से अध्ययन करने के बाद स्वर विद्या के नाम से जानी जाने वाली इस विधि को विज्ञान की तरह देखने पर जोर दिया है।

हिमालय की यात्रा से लौटने के बाद प्रो. राइट ने 2008 के बाद शिविर लगा कर ध्यान सिखाना शुरू किया अभी तक वे चार-चार दिन के बत्तीस साधना शिविर लगा चुके हैं। शिविरों में वे अपने अनुभव और स्वर विद्या के रहस्य भी बताते है।

उनके अनुसार अलह अलग तरह के कामों में कामयाबी दिलाने वाले स्वर भी अलग लग हैं जैसे दाएं स्वर यानी दाहिनी नाक से सांस चलते समय किए जा सकने वाले काम अलग हैं तो बांई तरफ चलने वाली सांस के समय किए जा सकने वाले कामों की श्रेणी अलग है।

स्वर विद्या के अनुसार शरीर में दो स्वर होते हैं, जिन्हें चंद्र स्वर व सूर्य स्वर कहते हैं। नाक के दाहिने छिद्र से चलने वाले स्वर को सूर्य स्वर कहते हैं। बाएं छिद्र से चलने वाले स्वर को चंद्र स्वर कहते हैं। योग विद्या के अनुसार इन्हें इडा और पिंगला भी कहते हैं। दोनों छिद्रों से चलने वाले श्वास को सुषुम्ना स्वर कहते हैं।

स्वारोदय यानी स्वर के उदय पहचान कर शुभ-अशुभ जानकर काम शुरु करना, निश्चित सफलता का सूचक माना जाता है। नासिका के जिस छिद्र से तीव्र श्वास चले, उसी को प्रमुख स्वर मानना चाहिए। जिस तरफ का स्वर बंद हो उस तरफ के छिद्र को अंगुली से बंद करके दूसरे स्वर को चलाने से स्वर बदल जाता है।

आप इच्छानुसार स्वर प्रारंभ कर इच्छित कार्य कर सकते हैं। प्रत्येक स्वर ढाई घडी में अपने आप बदल जाता है। स्वर को अधिकार में लाकर इच्छित लाभ व कार्य में सफलता प्राप्त की जा सकती है।

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» success, breath

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