आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

निजता और जवाबदेही

नई दिल्ली

Updated Fri, 02 Nov 2012 09:34 PM IST
 privacy and accountability
सार्वजनिक जीवन में निजता और जवाबदेही के बीच महीन रेखा होती है, लिहाजा इन दोनों के बीच संतुलन जरूरी होता है। मगर इन दोनों की विभाजक रेखा इतनी भी महीन नहीं होती कि उसे सूचना के अधिकार जैसे जन हथियार बने कानून से खतरा हो। फिर सवाल यह भी है कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में हैं, राजनीति कर रहे हैं या जो जिम्मेदारी के पदों पर बैठे हैं, उन्हें संदेह का लाभ क्यों दिया जाना चाहिए।
यह ठीक है कि सरकार ने अब सूचना के अधिकार कानून में प्रस्तावित संशोधनों को वापस ले लिया है, मगर याद रखना चाहिए कि ऐसा करने में उसे छह वर्ष लगे हैं। बल्कि यह तो तथ्य है कि यह कानून 2005 में बना था और उसके कुछ महीने बाद ही सरकार ने ऐसे संशोधन सामने रखे थे, जो इसे नख-दंतविहीन बनाने के लिए काफी थे। यदि ये संशोधन पारित हो जाते, तो सरकार से मिलने वाली जानकारियां सामाजिक और विकास कार्यों तक सीमित होकर रह जातीं। फिर यह पता करना मुश्किल हो जाता कि किस मंत्री ने किस ठेके में किसकी सिफारिश की थी या प्राकृतिक संपदा के आवंटन में किसी खास औद्योगिक घराने की तरफदारी तो नहीं की गई।

यह बिलकुल ठीक है कि निजता और सूचना के अधिकार के बीच संतुलन होना चाहिए, जैसा कि प्रधानमंत्री ने केंद्रीय सूचना आयुक्तों के सम्मेलन में इसे लेकर चिंता जताई थी। मगर निजता की आड़ में अपने पद या हैसियत का दुरुपयोग किया जाने लगे, तो उसे जायज नहीं ठहराया जा सकता। असल में जबसे सूचना का अधिकार कानून बना है, तभी से उसके दुरुपयोग की आशंकाएं जताई जा रही थीं और कहा जा रहा था कि इसके कारण सरकारी कामकाज तक प्रभावित हो सकता है।

मगर सात वर्षों के बाद हम देख सकते हैं कि इसके विरोध के पीछे मंशा कुछ और ही रही है, और इस मामले में तकरीबन सभी सरकारी अमलों का रवैया एक जैसा है। कुछेक मामलों में निश्चित ही भयादोहन जैसी बात हो सकती है, लेकिन आमतौर पर यह कानून भ्रष्टाचार, घोटालों और अनैतिक गठजोड़ों को सामने लाने का काम कर रहा है। इसके बावजूद इसकी राह में अब भी कई रोड़े हैं। मसलन, राजनीतिक दल तो चाहते ही नहीं कि उन्हें इसके दायरे में लाया जाए और उनसे उन्हें मिलने वाले चंदों के स्रोत पूछे जाएं।
  • कैसा लगा
Comments

स्पॉटलाइट

लव लाइफ होगी और भी मजेदार, रोज खाएं ये चीज

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

जूते, पर्स या जूलरी ही नहीं, फोन के कवर भी बन गए हैं फैशन एक्सेसरीज

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

BSF में पायलट और इंजीनियर समेत 47 पदों पर वैकेंसी, 67 हजार तक सैलरी

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

इन तीन चीजों से 5 मिनट में चमकने लगेगा चेहरा

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

नवरात्रि 2017: इस बार वार्डरोब में नारंगी रंग को करें शामिल, दीपिका से लें इंसपिरेशन

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

Most Read

मांगी भीख

Anganwadi workers will seek out rally
  • शनिवार, 23 सितंबर 2017
  • +

छात्रा घायल

Car collision with schoolgirl injured schoolgirl
  • शनिवार, 23 सितंबर 2017
  • +

दंपति और नातिन की सड़क हादसे में मौत

Couple returning home in Hardoi, and in Natin road accident
  • बुधवार, 30 अगस्त 2017
  • +

एसी कोच से निकला धुआं

Smoke from the AC coach of Ganga Satluj
  • बुधवार, 30 अगस्त 2017
  • +

तालाबंद कर प्रदर्शन

Lockout on DSN gate
  • मंगलवार, 12 सितंबर 2017
  • +

हाईवे जाम

After the death of the children, the villagers did the highway jam
  • गुरुवार, 14 सितंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!