आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

शक्ति प्रदर्शन की राजनीति

Santosh Trivedi

Santosh Trivedi

Updated Mon, 05 Nov 2012 11:51 AM IST
politics of power show
मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल के सबसे बड़े फेरबदल के हफ्ते भर के भीतर हुई कांग्रेस की 'महारैली' को पार्टी और सरकार के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर ही देखना चाहिए। यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान यह ऐसा पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी तीनों ने एक मंच से विपक्ष खासतौर से भाजपा पर तीखे हमले किए।
मगर सरकार की आर्थिक नीतियों के संबंध में उन्होंने कोई नई बात नहीं कही और तकरीबन वही बातें दोहराईं, जिन्हें कांग्रेस के नेता और प्रवक्ता अलग-अलग मंचों से कहते रहे हैं। वैसे भी एफडीआई और लोकपाल के मामले में सरकार की नीयत और नीति के बारे में कुछ भी छिपा नहीं है, बल्कि इस रैली के बाद साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में सरकार कुछ और कड़े आर्थिक कदम उठा सकती है। ममता बनर्जी के यूपीए से अलग होने के बाद निश्चित ही कांग्रेस पहले से कहीं अधिक हमलावर लगती है, लेकिन, महंगाई, भ्रष्टाचार और घोटालों के बारे में वह देश की जनता को किसी तरह आश्वस्त नहीं कर सकी।

यह नहीं भूलना चाहिए कि इन तीनों ही मुद्दों से आम आदमी सीधे जुड़ा हुआ है, जिनकी वजह से वह पार्टी से दूर हो रहा है। हैरत की बात यह है कि खुद राहुल गांधी इस व्यवस्था से मायूस लगते हैं! मगर, जैसी कि चर्चा है और कांग्रेस प्रवक्ता तक ने माना है कि शीघ्र ही राहुल को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, तो ऐसे में उन्हें कहीं अधिक राजनीतिक परिपक्वता दिखाने की जरूरत होगी।

वह राजनीतिक व्यवस्था बदलने की बात कर रहे हैं, ऐसी ही बात तो अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल भी कहते आए हैं। बीते आठ वर्ष से तो यूपीए की ही सरकार है और यह व्यवस्था उसके हाथ में है। ऐसा ही हाल बिहार का कहा जा सकता है, जहां सात वर्षों से सत्ता में काबिज नीतीश कुमार राज्य के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए विशेष दरजे की मांग कर रहे हैं।

अफसोस की बात है कि दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की रैली की तरह पटना में जनता दल (यू) की अधिकार रैली राजनीतिक ताकत दिखाने में भले सफल हुई हो, मगर कोई बड़ा संदेश देने में वह भी नाकाम रही। और फिर सिर्फ भीड़ को किसी पार्टी की लोकप्रियता का पैमाना नहीं माना जा सकता, क्योंकि राजनीतिक रैलियों में तो भीड़ अकसर जुटाई जाती है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

क्यों अकेले ट्रैवल करने से आज भी डरती हैं लड़कियां ?

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

सालों बाद मिला आमिर का ये को-स्टार, फिल्में छोड़ इस बड़ी कंपनी में बन गया मैनेजर

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

इस मानसून इन हीरोइनों से सीखें कैसा हो आपका 'ड्रेसिंग सेंस'

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

जब शूट के दौरान श्रीदेवी ने रजनीकांत के साथ कर दी थी ये हरकत

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

50 वर्षों बाद बना है इतना बड़ा संयोग, आज खरीदी गई हर चीज देगी फायदा

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

Most Read

मां-बेटियां दबीं

Due to the hailstorm in the rain, mother and daughters buried
  • रविवार, 23 जुलाई 2017
  • +

छात्रों का हंगामा

In the mid-day meal
  • रविवार, 23 जुलाई 2017
  • +

मुफ्त कनेक्शन पाओ

Show BPL Card, Get Free Connection
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

नर्सिंग होम

37 nursinghomes not found leagle
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

नाव बनी सहारा

Waterfalls on the way, boat bani Sahara
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

गंगा का जलस्तर

Ganga water level decreased by 35 cms
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!