आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

विकास की बैठक में राजनीति

Vikrant Chaturvedi

Vikrant Chaturvedi

Updated Fri, 28 Dec 2012 12:35 AM IST
politics in development meeting
राष्ट्रीय विकास परिषद की सालाना बैठकें अब आपसी तालमेल के बजाय घनघोर असहमति के लिए ही ज्यादा जानी जाती हैं। जिस परिषद को केंद्र और राज्यों के बीच सर्वोच्च नीति निर्धारक मंच माना जाता है, उसकी बैठकों में मुख्यमंत्रियों का सोते पाया जाना या उनका गुस्से से उठकर चले जाना भी अब शायद ही किसी को चौंकाता हो। यह सच है कि राजनीतिक और आर्थिक लाचारी का परिचय देती केंद्र सरकार संघीय ढांचे का पालन करने में भी उत्तरोतर विफल साबित हुई है।
सवाल उठता है कि भेदभाव का आरोप हमेशा विपक्षी राज्य सरकारें ही क्यों लगाती हैं। राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठकों में राज्य सरकारों द्वारा असंतोष व्यक्त करने का मौका आना ही क्यों चाहिए? केंद्र सरकार की ओर से समय रहते ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती, जिससे कि ऐसे महत्वपूर्ण अवसर व्यर्थ के विवाद में न बदलें? पर विरोधी मुख्यमंत्रियों के रवैये की भी बहुत सराहना नहीं की जा सकती।

ममता बनर्जी ने इस बार की बैठक में शिरकत नहीं की, क्योंकि पश्चिम बंगाल को वित्तीय मदद देने की उनकी मांग को केंद्र ने अनसुनी कर दी है। पर यही ममता पिछली बार की बैठक में थीं, जबकि तब से अब तक केंद्र के रवैये में बदलाव नहीं आया है। जयललिता बैठक से इसलिए बाहर निकल आईं, क्योंकि वक्ताओं के लिए आवंटित दस मिनट का समय उन्हें अपमानजनक लगा! एक दिन की बैठक में प्रधानमंत्री, राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग पैंतीस प्रतिनिधियों, योजना आयोग के उपाध्यक्ष तथा वित्त और कृषि मंत्रियों को अपनी बात रखने का अवसर देने के लिए इससे अधिक वक्त क्या वाकई दिया जा सकता है!

नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी ने अपने राज्यों में विकास की अमिट इबारत लिखी है। एक राज्य सामाजिक मोर्चे पर पिछड़ा होने के बावजूद विकास की शानदार कहानी कह रहा है, तो दूसरा बीमारू राज्य की पहचान से बाहर निकल आया है। इसके बावजूद एक मुख्यमंत्री अपने राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग कर रहा है, तो दूसरा वैश्विक मंदी की सच्चाई नकारकर गुजरात मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के तर्क गढ़ रहा है। ऐसे में 12वीं पंचवर्षीय योजना को अंतिम रूप देने का लक्ष्य कहीं पीछे छूट गया लगता है।   

  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

मानसून में इन तरीकों को अपनाकर पहले से ज्यादा जवां दिखेंगे मर्द

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

अपने आप को फिट रखने के लिए पापा सुनील के इस फंडे को फॉलो करती हैं अथिया

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

महिलाएं प्यार में देती हैं मर्दों को इस वजह से धोखा, रिसर्च में हुआ खुलासा

  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

...तो इन वजहों से महिलाओं का जल्दी बढ़ता है वजन

  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

जब बोनी कपूर की सास ने प्रेग्नेंट श्रीदेवी के साथ की थी ये हरकत, पैरों तले खिसक गई थी जमीन

  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

Most Read

मौत

Contractual death of a contractor
  • शनिवार, 15 जुलाई 2017
  • +

नर्सिंग होम

37 nursinghomes not found leagle
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

मुफ्त कनेक्शन पाओ

Show BPL Card, Get Free Connection
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

नाव बनी सहारा

Waterfalls on the way, boat bani Sahara
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

टेक्सटाइल पार्क

Land for textile park
  • शनिवार, 15 जुलाई 2017
  • +

महिलाओं का हंगामा

The incitement of the Bhaviyu women on the tractor
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!