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सिर्फ कानून ही पर्याप्त नहीं

Vikrant Chaturvedi

Vikrant Chaturvedi

Updated Wed, 19 Dec 2012 12:47 AM IST
only law is not enough
राजधानी में रविवार की रात एक छात्रा के साथ चलती बस में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना ने फिर साबित किया है कि चाहे लाख दावे किए जाएं, दिल्ली में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। यह बर्बर घटना इस बात का सुबूत है कि वहशी लोगों के मन में किसी तरह का खौफ ही नहीं रहा।
पूछा जा सकता है कि रात आठ-नौ बजे जब वह छात्रा अपने मित्र के साथ मदद की गुहार लगा रही थी, तब हमेशा राजनेताओं की सुरक्षा में तैनात रहने वाली दिल्ली पुलिस कहां थी? इत्तफाक से अभी संसद का सत्र भी चल रहा है। बीते 48 घंटे में पुलिस ने मुस्तैदी दिखाकर कुछ आरोपियों को पकड़ जरूर लिया है, मगर यह हकीकत है कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के मामले में उसका रिकॉर्ड बदतर है।

दिल्ली में पिछले वर्ष महिलाओं के साथ दुष्कर्म की 572 घटनाएं दर्ज की गई थीं और इस वर्ष यह आंकड़ा पार हो चुका है। आखिर ऐसा क्यों होता है कि घटना हो जाने के बाद जब संसद से सड़क तक चौतरफा शोर मचाया जाता है, तभी सरकार और पुलिस हरकत में आती हैं! बात सिर्फ राजधानी की नहीं है, पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा का यही हाल है।

ऐसी घटनाएं बताती हैं कि महिलाएं राजनीति से लेकर कॉरपोरेट जगत के शीर्ष पदों तक भले ही पहुंच गई हों, मगर उनकी अस्मिता और आत्मसम्मान को लेकर हमारी मानसिकता में बदलाव नहीं आया है। और बची-खुची कसर ऐसे लोग पूरी कर देते हैं, जिन्हें उनके पहनावे में खोट नजर आती है।

आखिर वे स्वयंभू पंचायतें इन दुष्कर्मियों के खिलाफ कोई फरमान क्यों जारी नहीं करतीं? राज्यसभा में जया बच्चन ने ठीक ही कहा है कि समय के साथ लोग यह घटना भूल जाएंगे, मगर उस पीड़ित छात्रा को पूरी जिंदगी इस उत्पीड़न के साथ ही बितानी होगी।

सवाल है कि ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाए? अब बलात्कारियों को फांसी की सजा देने की मांग की जा रही है, मगर ऐसा नहीं है कि मौजूदा कानून कमजोर है। असल में अभियोजन और न्यायिक प्रणाली इतनी लचर है कि या तो पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, या उसमें देर हो जाती है। यही सही वक्त है, जब बलात्कार, यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के मामलों में त्वरित न्याय के बारे में सोचना चाहिए। इसके लिए किसी अगली घटना का इंतजार नहीं किया जाए।

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