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26/11 में पाक ने प्रमुख गवाहों से जिरह की अनुमति मांगी

इसलामाबाद/एजेंसी

Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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मुंबई पर हुए 26/11 हमला मामले में पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत सरकार को दो खत लिखे हैं। इन खतों में उन्होंने बचाव पक्ष के वकीलों को मामले के प्रमुख गवाहों से जिरह की अनुमति देने के लिए कहा है। उनका कहना है कि यह अनुमति नहीं मिलने पर सभी आरोपी बिना सजा के छूट सकते हैं।
मालूम हो कि इस मामले के सात संदिग्धों के खिलाफ पाकिस्तान में मुकदमा चल रहा है। बीती 20 जुलाई को राजनयिक चैनल के माध्यम से भारतीय अधिकारियों को भेजे गये संदेश में पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने कहा कि बचाव पक्ष के वकील को जिंदा बचे हमलावर अजमल कसाब, मुख्य जांच अधिकारी रमेश महाले और मृत हमलावरों के शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों गणेश धुनराज और चिंतामन मोहिते से जिरह की अनुमति दी जानी चाहिए।

इससे पहले पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत को 17 जुलाई को पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधक अदालत के आदेश को भेजा था, जिसने पाकिस्तानी आयोग की जांच को अवैध करार दिया था। डॉन समाचार पत्र ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तानी अधिकारी अपने भारतीय समकक्ष की ओर से इस मुद्दे पर जवाब का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि इस मुद्दे पर एक स्मरणपत्र भेजा जा चुका है।

सूत्रों ने कहा कि यदि भारत सरकार बचाव पक्ष के वकीलों को जिरह की अनुमति नहीं देगी तो इससे पहले इस मामले में रिकार्ड किए गए अन्य गवाहों के बयान अमान्य हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कसाब का इकबालिया बयान, हमलावरों की सीसीटीवी फुटेज और राजनयिक चैनल के माध्यम से पाकिस्तान को सौंपे गए भारत सरकार के 780 दस्तावेज व्यर्थ साबित होंगे। एजेंसी

क्यों भेजा खत?
दरअसल इस मामले की सुनवाई के दौरान पाक आतंकरोधी अदालत भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूतों को अमान्य करार दे चुकी है। इस मामले में पाक सरकार ने एक न्यायिक आयोग को भारत भेजा था। इस आयोग ने भारत यात्रा के दौरान चार गवाहों के बयान रिकार्ड किए थे।

पाकिस्तान में चल रहे मुकदमे में आरोपियों का बचाव कर रहे वकीलों के गवाहों से जिरह करने की अनुमति नहीं मिलने की बात कहने के बाद अदालत ने आयोग के निष्कर्षों को खारिज कर दिया था। पाक सरकार का कहना है कि अगर भारत से जिरह की इजाजत मिल जाए तो इस मामले के आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सकता है।
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