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पर्यावरण को भी हथियार में बदल देगी हार्प

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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परमाणु कार्यक्रम और उसके विनाशकारी प्रभाव को लेकर व्याप्त चिंताओं के बीच पर्यावरण को भी हथियार बनाकर दुनिया को नष्ट करने की तकनीक अब तैयार हो गई है। हालांकि इसे शोध का नाम दिया जा रहा है लेकिन इसके भयानक परिणामों को लेकर दबी जुबान में इसका विरोध भी शुरू हो चुका है। इस खतरनाक तकनीक का नाम है हार्प।
अमेरिकी वायुसेना, नौसेना और अलास्का विश्वविद्यालय के सहयोग से अलास्का के गाकोन में वर्ष 1990 में हार्प कार्यक्रम को प्रारंभ किया गया था। अमेरिका ने अपने इस कार्यक्रम को बेहद गोपनीय रखा है लेकिन इसे लेकर उठने वाले हजारों सवालों के कारण अब हार्प कार्यक्रम की वेबसाइट पर कुछ जानकारी साझा गई है।

इससे जुडे़ सवाल और विवादों से भी वेबसाइट अटी पड़ी है, जिस पर इस कार्यक्रम को पर्यावरण का एक हथियार के रूप में उपयोग करने का आरोप लगाया गया है। यदि इस शोध का इस्तेमाल कभी सैन्य फायदों के लिए किया गया तो इससे मानव जीवन तबाह हो सकता है। खुद वैज्ञानिक भी मानते हैं कि इससे हजारों जीव ही नहीं बल्कि धरती के एक बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक डॉक्टर कुमार कृष्ण ने कहा कि वायुमंडल हमारी धरती पर एक रक्षा कवच के तौर पर काम करता है। वायुमंडल को नियंत्रित करना आसान नहीं है और न ही जमीनी स्तर ऐसा संभव हो सकता है। हमारी धरती स्थिर नहीं है क्योंकि इस पर कई प्रकार के दबाव रहते हैं। इसके अलावा यहां उल्का पिंडों की बारिश आदि हो सकती है। साथ ही अंतरिक्ष के विकिरण से धरती में कई सौ वर्षों के बाद काफी व्यापक बदलाव आने की आशंका भी है।

डॉ. कृष्ण ने कहा कि आयन मंडल या पर्यावरण का शोध बदलते पर्यावरण और ग्लोबल वार्मिंग तथा इससे होने वाले प्रभावों को कम करने में कारगर साबित हो सकता है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में बाढ़, सूखा, सुनामी, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है। यह शोध धरती पर जीवन को बचाने के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि अगर इस तकनीक का सैन्य इस्तेमाल किया जाता है तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे न केवल एक क्षेत्र या देश को नहीं बल्कि पूरी धरती को ही भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

क्या है हार्प तकनीक
हार्प यानी हाई फ्रीक्वेंसी एक्टिव एरोरल रिसर्च प्रोग्राम। इसकी मदद से वायुमंडल की ऊपरी परतों में से एक आयन मंडल या आयनोस्फेयर को समझने और उसके बारे में और जानकारी एकत्र की जा रही है। गौरतलब है कि आयन मंडल हमारे वायुमंडल की वह परत है जिसका उपयोग नागरिक और रक्षा नौवहन प्रणाली में किया जाता है।

कैसे है यह खतरनाक
हार्प कार्यक्रम की अधिकारिक वेबसाइट पर इस तकनीक के बारे में बताया गया है कि इस तकनीक में विद्युत चुंबकीय तरंगें वायुमंडल में उच्च आवृत्ति के तहत छोड़ी जाती है, जिससे वायुमंडल का एक सीमित हिस्सा नियंत्रित किया जा सकता है। इससे बाढ़ तक की स्थिति पैदा की जा सकती है या फिर तूफान भी लाया जा सकता है। साफ है कि इसमें पर्यावरण को नियंत्रित करके उसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।


हार्प तकनीक धरती पर जीवन को बचाने के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है लेकिन यदि इस तकनीक का सैन्य इस्तेमाल किया जाता है तो इससे न केवल एक क्षेत्र या देश बल्कि पूरी धरती को ही भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
डॉक्टर कुमार कृष्ण, वैज्ञानिक, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा
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