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नेपालः संविधान मसौदे पर नहीं बन सकी सहमति

काठमांडू/एजेंसी

Updated Sun, 27 May 2012 12:00 PM IST
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नेपाल में पिछले कई दिनों से चल रही बातचीत के बावजूद प्रमुख राजनीतिक पार्टियां भी संविधान के मसौदे पर आम सहमति बनाने में विफल रही हैं। इससे देश में राजनीतिक संकट गहराया जा सकता है क्योंकि नए संविधान लागू करने की समय सीमा रविवार आधी रात को खत्म हो रही है। मौजूदा हालातों को देखते हुए सेना को हाई अलर्ट कर दिया गया है। काठमांडू और आसपास के इलाकों में रैली निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नेपाली कांग्रेस के नेता बिमलेंद्र निधि ने कहा कि अभी तक राज्य पुनर्गठन के मसले पर कोई समझौता नहीं हो सका है। यह एक अहम मसला है जिसकी वजह से संविधान मसौदा रुका पड़ा हुआ है और हम अभी भी बातचीत जारी रखे हुए हैं। प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के शीर्ष नेताओं संविधान को लागू करने की समय सीमा खत्म होने से पहले विभिन्न संभावनाओं पर बैठकें कर रहे हैं। यदि राजनीतिक पार्टियों के बीच संविधान मसौदे पर कोई सहमति नहीं बनती है तो रविवार रात के बाद संविधान सभा खुद ही भंग हो जाएगी।

इसके पहले रविवार सुबह प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने राष्ट्रपति राम बरन यादव से मुलाकात की और उन्हें राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में अवगत कराया। राजनीतिक दलों के बीच राज्यों के पुनर्गठन को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। माओवादी-मधेशी पार्टियां जहां एकल जातीय आधार राज्य चाहती हैं, वहीं दूसरी ओर नेपाली कांग्रेस-सीपीएन (यूएमएल) गठबंधन बहु जातीय और आर्थिक व्यवहार्यता के आधार राज्यों के गठन के पक्ष में हैं।

राजनीतिक पार्टियों ने रविवार आधी रात के बाद संविधान सभा के खत्म होने के बाद के विकल्पों पर भी चर्चा की। शीर्ष राजनीतिक नेताओं ने संविधान सभा के चेयरमैन से मुलाकात कर संभावित राजनीतिक संकट से बचने के उपाय पर चर्चा की।

दो विकल्पों पर चर्चा
एक विकल्प राजनीतिक दलों के बीच कुछ बिंदुओं पर बनी सहमति के आधार पर लघु संविधान के घोषणा का है जबकि दूसरा राज्यों के पुनर्गठन पर आम सहमति के बाद संपूर्ण संविधान मसौदे को जारी करने का है।
क्या हो सकता है

यदि संविधान सभा संविधान मसौदे को तैयार किए बिना भंग हो जाती है तो सरकार के पास संविधान सभा के लिए नया सिरे से चुनाव कराने का विकल्प होगा।
सेना हाई अलर्ट पर

देश में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति को देखते हुए देश भर में सेना को हाई अलर्ट कर दिया गया है। 10 हजार सुरक्षा कर्मियों को राजधानी में तैनात किया गया है। इसके अलावा संविधान सभा की बैठक स्थल इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर की भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। नया बानेशवोर स्थित इस सेंटर के बाहर विभिन्न जातीय समूहों के लोग डेरा जमाए बैठे हुए हैं।

यूटर्न : माओवादी नए चुनाव के पक्ष में
यूसीपीएन-माओवादी पार्टी ने अपने पहले के रुख से पलटी मारते हुए देश में नई सरकार के गठन का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही पार्टी रविवार आधी रात तक यदि राजनीतिक पार्टियां आम राय बनाने में विफल रहती हैं तो एक साल के भीतर आम चुनाव कराए जाने का प्रस्ताव किया है। सीपीएन-यूएमण्ल के नेता योगेश भट्टराई ने कहा कि माओवादी चेयरमैन पुष्प कमल दहल और प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने अन्य पार्टियों के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक के दौरान यह प्रस्ताव रखा।
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