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और कितनी किरकिरी

Vikrant Chaturvedi

Vikrant Chaturvedi

Updated Wed, 21 Nov 2012 12:28 AM IST
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मनमोहन सिंह सरकार ने 2 जी स्पेक्ट्रम नीलामी के मामले में शुरू से अब तक जो रवैया अख्तियार किया है, वह क्षुब्ध तो करता ही है, दूरसंचार जैसे एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में उसकी नीतिगत विफलता और मनमानेपन का भी सुबूत देता है।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आवंटन रद्द किए जाने के बाद हाल में हुई 2 जी स्पेक्ट्रम की दोबारा नीलामी में लक्ष्य से कम राजस्व की प्राप्ति से बौखलाई सरकार अब दोबारा कैग पर हमलावर है कि उसके कपोल-कल्पित घाटे के आकलन के कारण दूरसंचार क्षेत्र की छवि खराब हुई है, जबकि सीबीआई की विशेष अदालत में पूर्व वित्त सचिव डी सुब्बाराव ने, जो इस समय रिजर्व बैंक के गर्वनर हैं, जो कुछ कहा है, उससे शीशे की तरह साफ है कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन के समय अहम मुद्दे पर वित्त और दूरसंचार मंत्रालय के बीच तालमेल नहीं था।

तब खुद सुब्बाराव ने 2001 की दर पर स्पेक्ट्रम आवंटित करने के दूरसंचार मंत्रालय के फैसले पर सवाल उठाया था। मानो पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के समय में की गई गलतियां ही काफी न हों, पिछले दिनों 2 जी स्पेक्ट्रम की दोबारा नीलामी से संबंधित पूरी सूचनाएं भी सरकार ने शीर्ष अदालत को नहीं दीं, जबकि उसके द्वारा 122 लाइसेंस रद्द करने के कारण ही यह नीलामी हुई।

इस मामले में अदालती सक्रियता पर सवाल उठाने का औचित्य इसलिए नहीं है कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाला सामने आने और शीर्ष अदालत के सक्रिय होने के बाद इससे जुड़ा कोई भी फैसला उसे संज्ञान में रखकर ही किया जाना है। सर्वोच्च न्यायालय की नाराजगी दरअसल इस बात को लेकर है कि सरकार ने पूरे लाइसेंस की नीलामी तो नहीं ही की, उसकी जानकारी भी उसे नहीं दी।

उदाहरण के लिए, अदालत को यह बताया ही नहीं गया कि 800 और 1,800 मेगाहर्ट्ज की नीलामी की जाएगी, 900 मेगाहर्ट्ज की नहीं। उसे यह भी पता नहीं था कि 0.1 प्रतिशत स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं होगी। इस पूरे मामले को हलके में लेने का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दूरसंचार मंत्रालय के अनुसचिव (अंडर सेक्रेटरी) ने दाखिल किया, जबकि शीर्ष अदालत पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी थी कि सचिव स्तर के अधिकारी का शपथपत्र ही स्वीकार  किया जाएगा। सरकार यह बात आखिर समझती क्यों नहीं कि 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में कभी कैग, तो कभी सर्वोच्च न्यायालय के बार-बार निशाने पर आने से उसी की छवि खराब हो रही है।

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