आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

तो ऐसे लड़ेंगे आतंकवाद से?

नई दिल्ली

Updated Fri, 23 Nov 2012 10:50 PM IST
high court comment at up to fight against terrorism
कसाब को फांसी देने के बाद ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे हम आतंकवाद के खिलाफ काफी सख्त हो चुके हैं। पर उसके अगले ही दिन आतंकवाद के प्रति ढुलमुल रवैये पर इलाहाबाद और दिल्ली उच्च न्यायालयों ने जो तीखी टिप्पणियां कीं, वे असलियत बताने के लिए काफी हैं।
उत्तर प्रदेश का मामला लें, तो बनारस के संकटमोचन मंदिर और कैंट स्टेशन सहित कई जगहों पर बम विस्फोट और रामपुर में सीआरपीएफ कैंप पर हमले में शामिल लोगों पर से मुकदमा वापस लेने की सपा सरकार की पहल पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय को टिप्पणी करनी पड़ी है कि जब मामला अदालत में है, तो उसे ही तय करने दीजिए, सरकार खुद कैसे तय कर सकती है कि कौन आतंकवादी है! विद्रूप देखिए, उत्तर प्रदेश सरकार उन लोगों पर से मुकदमा वापस लेने की तैयारी कर रही है, जिन्होंने बम विस्फोटों में न सिर्फ अपनी लिप्तता स्वीकार की थी, बल्कि जिनकी निशानदेही पर कुछ बरामदगियां भी की गई थीं।

आतंकवाद के प्रति उस सरकार का यह रवैया और भी चिंतनीय है, जिसके सत्ता में आते ही सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी का मामला तो और भी स्तब्ध करने वाला है। वर्ष 1996 में दिल्ली के लाजपतनगर में हुआ बम विस्फोट दो वजहों से ध्यान खींचने वाला था। एक तो उस विस्फोट में पहली बार राष्ट्रीय राजधानी में अंडरवर्ल्ड की लिप्तता के सुबूत सामने आए थे।

और दूसरा, पहले दिन कार में विस्फोट करने में विफल रहने पर आतंकियों ने दूसरे दिन उसी जगह उसी कार में विस्फोट किया! लेकिन पुलिस की ओर से इस मामले में न सही ढंग से पैरवी की गई, न अभियुक्तों की पहचान पीड़ितों से कराई गई, और न ही अहम गवाहों के बयान दर्ज करने की जरूरत समझी गई! जिस आदमी ने आतंकियों को हथियार देने के अलावा अपने घर में पनाह दी, पुलिस ने उसे आरोपी के बजाय गवाह के रूप में पेश किया! मानो यही काफी न हो, पुलिस ने अपनी डेली डायरी में इस मामले की खोजबीन से संबंधित एंट्री भी दर्ज नहीं की। यह एक के बाद एक हुई चूक का ही नतीजा है कि निचली अदालत से फांसी की सजा पाए तीन में से दो अभियुक्त दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा बरी कर दिए गए और तीसरे को उम्रकैद दी गई। ये दोनों प्रकरण हमारी सरकारों और पुलिस-प्रशासन से आतंकवाद के खिलाफ मुकम्मल तैयारी और अतिरिक्त सजगता की मांग करते हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

कम दाढ़ी की वजह से हैं परेशान? इन तरीकों से पाएं राहत

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

20 दिन तक सिर्फ गाजर और ब्लैक कॉफी के सहारे जिंदा रहा ये एक्टर

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

इस हीरोइन को शाहिद ने दी चेतावनी, कहा, 'सबकुछ भुलाकर आगे बढ़ो'

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

दिमाग के लिए फायदेमंद है व्रत रखना, जानें इसके और भी फायदे

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

30 महीने और 45 पारियों के बाद विराट कोहली के साथ हुआ कुछ ऐसा

  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

Most Read

अमर उजाला का एंड्रॉयड ऐप

amar uajala android app
  • बुधवार, 9 नवंबर 2016
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top