आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

एक उम्मीद का खत्म होना

Ashok Kumar

Ashok Kumar

Updated Mon, 24 Sep 2012 02:55 PM IST
end of hope
तकरीबन दो साल पहले गांधीवादी अन्ना हजारे की अगुआई में शुरू हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की जो परिणति हुई है, उससे उन करोड़ों बेबस लोगों को धक्का जरूर लगा होगा, जो इसे एक उम्मीद की तरह देख रहे थे। ये वे लोग हैं, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में राशन दुकानों से कोटे का सामान लेने से लेकर लाइसेंस बनवाने और जमीन की रजिस्ट्री करवाने से लेकर इलाज करवाने तक रिश्वत देनी पड़ती है।
ये व्यवस्था के मारे वे लोग हैं, जिनका भरोसा देश के राजनीतिक वर्ग से टूट चुका है। दरअसल ऐसे समय जब रोजाना नए-नए घोटाले सामने आ रहे हों और भ्रष्टाचार के आरोपों से शीर्ष स्तर तक अछूता न हो, तब आम लोगों को अन्ना के आंदोलन में एक रोशनी नजर आई थी। इसीलिए जंतर-मंतर से लेकर रामलीला मैदान तक लोग जुटते चले गए। इस मिल रहे समर्थन के पीछे अन्ना हजारे की स्वच्छ और निर्विवाद छवि भी रही है, बावजूद इसके कि वह कोई बड़े प्रवर्तक या राजनीतिक चिंतक नहीं हैं।

असल में लोगों को उनमें एक ऐसा ईमानदार आदमी नजर आया, जो उनकी अपनी भाषा में उनकी तरह बात करता है। मगर, जिस तरह से अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल की राहें अलग हुईं हैं, उसने इस आंदोलन के अंतर्विरोधों और उसकी सीमाओं को ही उजागर किया है। हालांकि शुरुआत से ही ऐसे कई मौके आए, जब यह लगता था कि कहीं यह आंदोलन अपने उद्देश्य से भटक तो नहीं रहा है।

यह जनांदोलन देश भर में बड़े बांधों, परमाणु बिजली घरों, जमीन अधिग्रहण और विस्थापन आदि को लेकर चल रहे तमाम छोटे-छोटे आंदोलनों से इसलिए भी अलग था, क्योंकि इसने सीधे राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दी थी। और अब अरविंद केजरीवाल जिस राजनीतिक विकल्प की बात कर रहे हैं, क्या वह जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतर पाएगा और क्या वह खुद चुनावी राजनीति में उतरने के बाद अपनी प्रतिबद्धताओं से जुड़े रह पाएंगे?

जैसा कि खुद अन्ना ने भी कहा है, इसकी क्या गारंटी है कि जिन्हें अच्छा मानकर चुन लिया जाए, वे चुने जाने के बाद ईमानदार बने रहेंगे? ऐसे वक्त में जबकि नीतियों का विरोध करने के नाटक और साथ-साथ सत्ता में हिस्सा लूटने को तत्पर राजनीतिक दलों ने तमाशा खड़ा कर रखा है, इस आंदोलन की यह परिणति अप्रत्याशित नहीं है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

क्यों अकेले ट्रैवल करने से आज भी डरती हैं लड़कियां ?

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

सालों बाद मिला आमिर का ये को-स्टार, फिल्में छोड़ इस बड़ी कंपनी में बन गया मैनेजर

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

इस मानसून इन हीरोइनों से सीखें कैसा हो आपका 'ड्रेसिंग सेंस'

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

जब शूट के दौरान श्रीदेवी ने रजनीकांत के साथ कर दी थी ये हरकत

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

50 वर्षों बाद बना है इतना बड़ा संयोग, आज खरीदी गई हर चीज देगी फायदा

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

Most Read

मां-बेटियां दबीं

Due to the hailstorm in the rain, mother and daughters buried
  • रविवार, 23 जुलाई 2017
  • +

छात्रों का हंगामा

In the mid-day meal
  • रविवार, 23 जुलाई 2017
  • +

मुफ्त कनेक्शन पाओ

Show BPL Card, Get Free Connection
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

नर्सिंग होम

37 nursinghomes not found leagle
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

नाव बनी सहारा

Waterfalls on the way, boat bani Sahara
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

गंगा का जलस्तर

Ganga water level decreased by 35 cms
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!