आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

चेहरे बदलने की एक और कवायद

नई दिल्ली

Updated Sun, 28 Oct 2012 08:07 PM IST
editorial 28 oct
मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर उम्मीद लगाए बैठे लोगों की हताशा समझी जा सकती है। साफ है कि लोकसभा चुनाव से पहले महंगाई और भ्रष्टाचार के कारण आम जनता के निशाने पर आने के बावजूद सरकार में नए चेहरों को लाने और कुछ पुराने लोगों को बाहर या महत्वहीन करने के पीछे सिद्धांत के बजाय सुविधाओं की राजनीति हावी रही है। यही कारण है कि उस आंध्र प्रदेश से सर्वाधिक लोगों को मंत्री पद का तोहफा दिया गया है, जहां विधानसभा चुनाव भी होने हैं, लेकिन स्वतंत्र तेलंगाना के मुद्दे और जगन मोहन रेड्डी के असर के कारण वहां कांग्रेस के लिए विकट चुनौती है।
राज्य के वरिष्ठ कांग्रेसियों को दरकिनार कर पृथक तेलंगाना के विरोधी नवागंतुक पी बलराम नायक को मंत्री पद देना ही बहुत कुछ कह जाता है। इसी तरह पश्चिम बंगाल में ममता के आलोचक अधीर रंजन चौधुरी और दीपा दासमुंशी समेत तीन लोगों को मंत्री बनाकर तृणमूल को सख्त संदेश देने की कोशिश तो की ही गई है, पंचायत चुनाव से पहले पार्टी में जान फूंकने का लक्ष्य भी है।

यह सही है कि राहुल गांधी के मंत्रिमंडल में शामिल न होने के बावजूद अजय माकन, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जैसे उनके निकटस्थों को प्रोन्नत किया गया है, और इसमें कोई हर्ज भी नहीं है, लेकिन एफडीआई-विरोधी हवा में आर्थिक सुधार के समर्थक आनंद शर्मा का मंत्रालय बरकरार रहना बताता है कि मनमोहन सिंह की भी खूब चली है। यही क्यों, कमलनाथ को संसदीय कार्य मंत्री की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपकर परिवार के प्रति निष्ठा को भी पुरस्कृत किया गया है।

लेकिन विवादास्पद सुबोधकांत सहाय से इस्तीफा लेकर अगर सख्त संदेश देने की कोशिश की गई है, तो उतने ही विवादों में घिरे सलमान खुर्शीद को विदेश मंत्रालय में प्रोन्नत कर सरकार क्या बताना चाहती है? शशि थरूर की वापसी के पीछे क्या औचित्य है, यह भी सरकार को बताना चाहिए, क्योंकि अगर वह पहले विवादास्पद थे, तो अब साफ कैसे हो गए? एक उद्योग घराने के दबाव पर एस जयपाल रेड्डी को पेट्रोलियम मंत्रालय से जिस तरह हटाया गया है, वह सबसे स्तब्ध करने वाला फैसला है। जाहिर है, जब मंत्रियों को लाने, हटाने और प्रोन्नत करने के पीछे कोई सुस्पष्ट सोच नहीं है, तो इस बदलाव से भला कितनी उम्मीद करें!

  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

editorial

स्पॉटलाइट

Toyota Camry Hybrid: नो टेंशन नो पोल्यूशन

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

क्या करीना कपूर ने बदल दिया अपने बेटे तैमूर का नाम ?

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

Oscars 2017: घोषणा किसी की, अवॉर्ड किसी को

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

कजरारे कजरारे के बाद फिर बेटे बहू के साथ दिखेंगे बिग बी

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

क्या आप भी दवा को तोड़कर खाते हैं? उससे पहले पढ़ें ये खबर

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

Most Read

अमर उजाला का एंड्रॉयड ऐप

amar uajala android app
  • बुधवार, 9 नवंबर 2016
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top