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सरकारी कंडोम के विज्ञापन से कैसे अलग हैं प्राइवेट कंडोम विज्ञापन

अनुराधा गोयल

Updated Wed, 11 Jul 2012 12:00 PM IST
diffrence between government condom contraceptive ads and private condom ads
भारतीय दर्शक दूरदर्शन के बजाय प्राइवेट चैनल्स को अधिक महता देने लगा। ऐसे में सरकार ने सैटेलाइट चैनलों पर कंडोम और कंट्रासेप्शन के विज्ञापनों का प्रचार करने की जिम्मेदारी दी। जिनमें परिवार नियोजन को मुख्य रूप से केंद्र में रखा जाए लेकिन इन विज्ञापनों को बनाने के लिए अपनाई गई आचार संहिता को प्राइवेट कंपनियों ने दरकिनार कर दिया। यानी कंडोम के विज्ञापनों में दिखाई जाने वाली अश्लीलता की रोक पर सरकार का नियंत्रण खोता गया और निजी कंपनियां कंडोम और कंट्रासेप्शन के विज्ञापनों को बनाने के लिए अधिक से अधिक बोल्डनेस और अश्लीलता का तड़का लगाती रही।
सवाल-अश्लील कंडोम और कंट्रासेप्‍शन के विज्ञापनों पर सरकार अंकुश क्यों नहीं लगा रही?
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