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पानी का फलता कारोबार

Arvind Thakur

Arvind Thakur

Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
the growing market of water trading
हवा के बाद मनुष्य के लिए सबसे अहम चीज है पानी इसलिए अर्थशास्त्र के विद्वान कौटिल्य ने पानी को कर मुक्त रखने की बात कही थी। हिन्दू धर्म में प्यासे व्यक्ति को जल पिलाना सबसे बड़ा पुण्य कहा गया है। इसलिए सामाजिक कार्यकर्ता बोतल बंद जल का विरोध कर रहे हैं। छठे विश्व जल सम्मेलन में भी पानी के बाजार के विरोध में आवाज उठी और सामूहिक रूप से माना गया कि प्रकृति के नि:शुल्क उपहार पानी का व्यापार नहीं होना चाहिए।
जबकि पानी बेचने वाली कंपनियां जल संकट के समाधान के नाम पर पानी का बाजार खड़ा करने की योजना बना रही है क्योंकि इस कारोबार में 70 फीसदी मुनाफा है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में पानी का सालाना कारोबार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का है, जो लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पानी के व्यवसायी भविष्य में इसे विश्व की सबसे बड़ी इंडस्ट्री के रूप में देख रहे हैं।
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