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ऐसे बदलें नकारात्मक सोच

Priyanka Padlikar

Priyanka Padlikar

Updated Wed, 08 Aug 2012 02:06 PM IST
how to change negative thinking
कई बार मन में नकारात्मक विचार कुछ इस तरह घर कर जाते हैं कि हमारी सोच ही नकारात्मक होती जाकी है और जीवन में सिर्फ निराशा ही दिखती है। नकारात्मक विचार मन में जितने अधिक होंगे अवसाद उतनी ही तेजी से हमें घेरेगा। ऐसे में इन्हें खुद से दूर रखने का हर संभव प्रयास हमारे लिए जरूरी है। अगर आप भी अक्सर ऐसे ही नकारात्मक भावों से घिर जाते हैं तो अपनी भीतर छोटे-छोटे बदलाव करें और सकारात्मक दिशा में बढ़ें।
मनोविज्ञान को समझें
मनोविज्ञान में नकारात्मक भावों से दूर रखने के लिए कॉग्नीटिव बिहेवियरल थेरेपी, साइकोथेरेपी आदि विधाओं में कई उपाय हैं। आप इनसे संबंधित किताबें पढ़ सकते हैं जिससे बहुत हद तक आपकी सोच में बदलाव आएगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

दौर बीत जाता है
हर समस्या का अपना एक दौर होता है जो जीवन में कभी न कभी आता है और बीत भी जाता है। ऐसे में किसी समस्या को अपने जीवन से इतना बड़ा न बनाएं कि वह दौर आपको अपनेआप से बड़ा लगने लगे। बड़ी से बड़ी समस्या को आप सिर्फ एक दौर मानकर चलें तो मन में निराशा कभी बैठ ही नहीं सकती।

अपनी काबिलियत को न भूलें
हो सकता है समय सही न हो, हो सकता है आपकी किसी गलती का खामियाजा आपको दिन-रात परेशान करता हो, लेकिन इन सबके बीच आपके व्यक्तित्व के गुणों कभी दरकिनार न करें। बुरे से बुरे समय में भी अपने गुणों को याद रखें। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता लेकिन हर किसी में अच्छाई-बुराई तो होती ही है। इसलिए अपनी कमियों को पहचानें पर अपने गुणों की अनदेखी न करें।

खुद निर्णय लेना सीखें
अवसाद की स्थिति में मजबूत से मजबूत व्यक्ति भी निर्णय नहीं ले पाता। ऐसे में छोटे-छोटे निर्णयों को लें और उनपर अमल करें। ये न सोचें कि आपके निर्मय का परिणाम क्या होगा, सिर्फ यह ध्यान में रखें कि एक बार अगर अपने किसी निर्णय पर अमल किया तो वह अनुभव ही होगा।

जीवन में सिर्फ बुरा नहीं
सोच बदलने का फेर है। किसी बुरे दौर से गुजरने वाले हर व्यक्ति को पता होना चाहिए की जीवन में जहां बुराई है, वहीं अच्छाई भी है। हर दौर को अगर अपने जीवन का एक अनुभव मानकर चलें तो नकारात्मक भावों का मन पर प्रभाव कम पड़ता है।

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