आपका शहर Close

जी न्यूज के संपादकों को नहीं मिली जमानत

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Thu, 29 Nov 2012 01:32 AM IST
zee news editors did not get bail
दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को टीवी चैनल जी न्यूज के दो संपादकों सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्होंने दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इन पर पुलिस ने कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल की कंपनी के खिलाफ खबर न चलाने के बदले 100 करोड़ रुपये की वसूली का प्रयास करने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं।
उल्लेखनीय है कि कोयला घोटाले में जिंदल समूह का नाम आने के बाद से जी ने उसके खिलाफ अभियान चला रखा था। जिंदल ने दोनों संपादकों का स्टिंग ऑपरेशन कर उनके द्वारा धन वसूलने की कोशिश की सीडी बनाई और पुलिस को सौंप दी। मंगलवार को इन्हें गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने अदालत से कहा कि जी न्यूज के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और एमडी पुनीत गोयनका को भी मामले में अभियुक्त बनाया गया है। चंद्रा को उनके संपादकों द्वारा वसूली की योजना की जानकारी थी। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गोमती मनोचा ने चौधरी और अहलूवालिया को 30 नवंबर तक पुलिस कस्टडी में रखने का आदेश सुनाया। पुलिस ने दोनों की तीन दिन की हिरासत मांगी थी। सरकारी वकील राजीव मोहन ने कहा कि इस मामले में रचे गए षड्यंत्र की तह तक पहुंचने के लिए हिरासत जरूरी है।

पुलिस ने अदालत से कहा कि दोनों संपादकों ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड से विज्ञापन के रूप में 100 करोड़ रुपये की मांग की थी। चौधरी और अहलूवालिया के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 384 (धन उगाही), 420 (धोखाखड़ी), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 511 (ऐसे अपराध के लिए प्रेरित होना जिनमें दोषी पाए जाने पर आजीवन कैद या ऐसी ही सजा दी जा सकती है) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सरकारी वकील ने कहा कि पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि कैग की रिपोर्ट आखिर चैनल के हाथ कैसे लगी। यह रिपोर्ट ही दोनों समूहों के बीच विवाद का कारण थी। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास अभियुक्तों के खिलाफ वीडियो-ऑडियो सबूत हैं। जिंदल ग्रुप के राजीव मुतरेजा, सुशील कुमार और विवेक मित्तल से जी के संपादकों ने संपर्क किया था। बातचीत और सौदेबाजी की थी। इसकी सीडी जिंदल समूह ने पुलिस को सौंपी है।

पुलिस का दावा है कि जिंदल समूह द्वारा पेश की गई स्टिंग ऑपरेशन की सीडी फोरेंसिक जांच में सही पाई गई है। पुलिस के पास तीन घंटे की सीडी है। इसे दक्षिण दिल्ली स्थित एक फाइव स्टार होटल में बनाया गया है।

सरकार ने कहा कोई राजनीतिक दबाव नहीं
सरकार इस बात से सहमत नहीं है कि जी न्यूज चैनल के संपादकों की गिरफ्तारी का अर्थ मीडिया पर लगाम कसना है। सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि यह घटनाक्रम कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। यह सरकार का मामला नहीं है। उन्होंने जी-जिंदल विवाद में किसी राजनीतिक दबाव के आरोप को भी खारिज किया। अपने संपादकों की गिरफ्तारी को जी न्यूज समूह ने मीडिया की आजादी पर पाबंदी बताया था। साथ ही नवीन जिंदल के कांग्रेसी सांसद होने की बात कहते हुए समूह ने राजनीतिक दबाव की बात भी कही थी। मनीष तिवारी ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया के बारे में कुछ कह नहीं सकते। यह पुलिस कार्रवाई का हिस्सा है।

'सरकार को जांच पूरी होने तक जी न्यूज का लाइसेंस निलंबित कर देना चाहिए।'
- जस्टिस मार्कंडेय काटजू, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष
Comments

स्पॉटलाइट

Bigg Boss 11: बंदगी के ऑडिशन का वीडियो लीक, खोल दिये थे लड़कों से जुड़े पर्सनल सीक्रेट

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

सुष्मिता सेन के मिस यूनिवर्स बनते ही बदला था सपना चौधरी का नाम, मां का खुलासा

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

'दीपिका पादुकोण आज जो भी हैं, इस एक्टर की वजह से हैं'

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

B'Day Spl: 20 साल की सुष्मिता सेन के प्यार में सुसाइड करने चला था ये डायरेक्टर

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

RBI ने निकाली 526 पदों के लिए नियुक्तियां, 7 दिसंबर तक करें आवेदन

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

Most Read

पुरुषों के आत्महत्या करने की खबर कभी नहीं सुनी : मेनका 

Never heard of men committing suicide, Says Minister Maneka Gandhi
  • शुक्रवार, 30 जून 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!