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एफडीआई पर यूपीए को अखिलेश ने दिखाए कड़े तेवर

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Sat, 17 Nov 2012 09:56 PM IST
will decide on fdi support in parl says akhilesh
खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश (एफडीआई) के मसले पर संसद के अंदर सपा के रुख को लेकर भले ही अभी कुछ कहना मुश्किल है, मगर उत्तर प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव ने यूपीए सरकार को कड़े तेवर जरूर दिखा दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने दो टूक कह दिया है कि किसी के बुलावे पर भोज में जाने और संसद में निर्णय लेना अलग अलग बातें हैं। संसद के शीत सत्र के दौरान सपा अपना निर्णय लेगी। पार्टी खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के समर्थन में नहीं है। यह किसानों के हित में नहीं है।

अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही यूपीए सरकार के लिए अखिलेश यादव के ये बोल सुखद संकेत नहीं दे रहे हैं। सपा ने हालांकि अपने पत्ते पूरी तरह से खोले नहीं है, लेकिन अखिलेश ने बल्ला भांजकर यूपीए सरकार और कांग्रेस को पेशानी पर बल देने को बाध्य तो कर दिया है। कांग्रेस के मैनेजर इस बयान से जाहिर तौर पर परेशान हैं। फिर भी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को साधने की अंदरखाने कोशिशों को अंजाम दिया जा रहा है।

दरअसल, अखिलेश ने एफडीआई पर पार्टी के पुराने रुख से हटना फिलहाल मुनासिब नहीं समझा है। उन्होंने सपा और उत्तर प्रदेश सरकार के विरोध को शनिवार को दुबारा जाहिर करते हुए कहा कि अगर यूपीए सरकार को लगता है कि खुदरा क्षेत्र में एफडीआई किसान के हित में है तो वह इसे साबित करे। साथ ही उन्होंने कहा कि सपा और प्रदेश सरकार को नहीं लगता कि यह किसानों के फायदे में है।

जब उनसे पूछा गया कि एक तरफ तो मुलायम सिंह और वे प्रधानमंत्री के साथ भोज कर रहे हैं और दूसरी तरफ एफडीआई का विरोध कर रहे हैं, तो अखिलेश ने जवाब दिया कि राजनीति में बुलावे और न्योते होते रहते हैं। लंच डिनर में आना जाना लगा रहता है, पर संसद में पार्टी खुद अपने फैसले लेती है। इस मामले में बिना नाम लिए बसपा की चुटकी लेते हुए अखिलेश ने कहा कि हम डिनर करते हैं तो हमारे प्रदेश की दूसरी पार्टी के नेता भी तो लंच करते हैं।

मेरठ नहीं आगरा और वाराणसी पर ध्यान दें अजित सिंह
नागरविमानन मंत्री अजित सिंह की ओर से मेरठ में एयरपोर्ट को लेकर लिखी चिट्ठी के जवाब में अखिलेश ने कहा है कि मेरठ की हवाई पट्टी छोटी है। फिर भी अगर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री को उत्तर प्रदेश में एयरपोर्टों का विकास करना है तो वह मेरठ की बजाय वाराणसी और आगरा पर लगाएं। यह दुनियाभर के पर्यटकों के लिए बेहतर होगा।

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