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सांप्रदायिक हिंसा में यूपी देश भर में अव्वल

नई दिल्ली/ ब्यूरो

Updated Thu, 06 Dec 2012 12:40 PM IST
up  tops in communal violence in country
कानून व्यवस्था की बदहाली के आरोपों को झेल रही उत्तर प्रदेश सरकार सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में भी कटघरे में खड़ी हो गई है। दो संप्रदायों के बीच भड़की हिंसा के मामलों में पिछले दो साल के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम सबसे ऊपर है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, प्रदेश में इस साल अक्तूबर तक ही 104 सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं में 34 लोग मारे गए।
गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में सांसद मोहम्मद अदीब के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। सिंह ने सदन में बीते दो साल में देश में हुई सांप्रदायिक हिंसा का ब्यौरा पेश करते हुए उत्तर प्रदेश का यह आंकड़ा दिया।
उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा के मामले को राज्यों की जिम्मेदारी करार दिया। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2011 में भी उत्तर प्रदेश में ही सबसे अधिक सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुईं।

पिछले साल हुईं 84 घटनाओं में 12 लोग मारे गए। मंत्रालय ने कहा है कि पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। लिहाजा सांप्रदायिक दंगों से निपटने और इस संबंध में आंकड़े रखने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

गृहमंत्रालय के मुताबिक इस मामले में महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है जहां इस साल अक्तूबर तक 83 वारदातें हुईं जिनमें 13 की जान गई। पिछले साल महाराष्ट्र में 88 स्थानों पर हिंसा भड़की थी, जिसमें 15 लोग मारे गए थे।

महाराष्ट्र के बाद मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और झारखंड का नंबर हैं। कुल मिला कर इस साल अक्तूबर तक पूरे देश में 560 जगहों पर सांप्रदायिक हिंसा भड़की और 90 लोगों की जान गई। पिछले साल यह आंकड़ा 580 का था।

केंद्र सरकार ने जेलों में बंद मुसलिम युवकों के बारे में भी जानकारी दी। जदयू के सांसद साबिर अली के सवाल के लिखित जवाब में गृह राज्यमंत्री ने कहा है कि जेलों में मुकदमा झेल रहे 241200 आरोपी हैं, जिनमें मुसलिम लड़कों की संख्या 51206 है।

यह संख्या कुल आरोपियों का करीब 21 फीसदी है। जबकि जेलों में बंद दोषी करार दिए गए लोगों की संख्या 128592 है जिसमें मुसलिमों की संख्या 17.8 प्रतिशत है। सरकार ने कहा है कि देश की कानून व्यवस्था धर्म, जाति और समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करती है।

गौरतलब है कि सपा कथित तौर पर निर्दोष मुसलिम युवकों को आपराधिक व आतंकी घटना में फंसाने का आरोप सरकार पर लगा रही है। सरकार ने कहा है कि अगर किसी भी नागरिक को पुलिस व्यवस्था से शिकायत है तो वह न्यायपालिका के सामने अपनी बात रखकर न्याय पाने को पूरी तरह स्वतंत्र है।
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