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इंदिरा आवासः भ्रष्टाचार में यूपी का चौथा स्‍थान

महेंद्र तिवारी/लखनऊ

Updated Mon, 03 Dec 2012 11:34 AM IST
up on fourth position in indira awas allocation corruption
इंदिरा आवास आवंटन को लेकर एक सुखद तस्वीर सामने आई है लेकिन यूपी की तस्वीर इसमें भी जुदा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि इंदिरा आवास आवंटन के मामले में ज्यादातर प्रदेशों में भ्रष्टाचार की शिकायतें न के बराबर पाई गई हैं, मगर यूपी में छह फीसदी से ज्यादा गांवों में भ्रष्टाचार की शिकायतें मिली हैं। यह राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पिछले पांच वर्षों में बने इंदिरा आवासों के निर्माण की गुणवत्ता के साथ विभिन्न बिंदुओं के आइने में देश के 316 जिलों की 3083 ग्राम पंचायतों का सर्वे कराया। जिन 27 राज्यों का टीम ने सर्वे किया, उनमें 16 प्रदेश ऐसे सामने आए हैं जहां इंदिरा आवास के संबंध में भ्रष्टाचार की शिकायतें बिलकुल नहीं मिली। लेकिन यूपी के 32 जिलों के 317 गांवों में किए गए पड़ताल की तस्वीर चौंकाने वाली है।

रिपोर्ट के अनुसार यहां 6.31 प्रतिशत गांवों में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए जबकि शिकायतों का राष्ट्रीय औसत 2.66 दर्ज किया गया है। यहां से ज्यादा शिकायतें मध्यप्रदेश, बिहार और पंजाब में ही सामने आई हैं। इंदिरा आवास आवंटन की पारदर्शिता के लिहाज से दो प्रावधान बेहद सख्त हैं। पहला, ग्रामसभा द्वारा लाभार्थियों की एक स्थाई वेटिंग लिस्ट बनानी चाहिए और उसके आधार पर ही आवासों का आवंटन होना चाहिए। मगर प्रदेश के 17.98 फीसदी गांव ऐसे हैं, जहां स्थाई प्रतीक्षा सूची तैयार ही नहीं की गई है।

दूसरा, स्वीकृत आवासों की सूची विभाग की वेबसाइट, पंचायत भवन और पंचायत क्षेत्र के प्रमुख भवनों पर पेंटिंग कर दर्ज कराई जानी चाहिए। मगर यूपी में करीब 53 प्रतिशत ऐसे गांव सामने आए जहां गांव की दीवारों पर यह सूचना दर्ज नहीं कराई जाती।

प्रदेश        भ्रष्टाचार की शिकायत वाले गांवों की संख्या (प्रतिशत में)
मध्यप्रदेश            7.93
बिहार               6.50
पंजाब               6.45        
उत्तर प्रदेश           6.31

स्थाई प्रतीक्षा सूची न बनाने वाले जिले
-अलीगढ़, बागपत, बलरामपुर, एटा, इटावा, ज्योतिबाफुलेनगर, कानपुर देहात, मैनपुरी, मरेठ, संतकबीरनगर, श्रावस्ती और उन्नाव।

फैजाबाद, बस्ती और चंदौली में घटिया निर्माण
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इंदिरा आवासों के निर्माण की गुणवत्ता (क्वालिटी) के स्तर की पड़ताल कराई तो फैजाबाद, चंदौली और बस्ती में स्थिति ज्यादा ही खराब नजर आई। टीम ने यूपी के 32 जिलों के जिन 1357 इंदिरा आवासों का सत्यापन किया उनमें मानक आधार पर बने आवासों को ढूंढ़ने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। सिर्फ 4.6 फीसदी आवास ही स्टैंडर्ड स्तर के पाए गए। टीम ने अस्थाई दीवार, अस्थाई छत, बिना प्लास्टर की दीवार, अस्थाई फर्श और बिना दरवाजे और खिड़कियों के आधार पर खराब (पुअर) श्रेणी वाले आवासों को चिह्नित किया।

सर्वे वाले जिलों में 14 प्रतिशत गांव इस श्रेणी में पाए गए। प्रदेश के बस्ती, चंदौली और फैजाबाद जिलों को खराब गुणवत्ता वाले आवासों के लिहाज से रिपोर्ट में खास उल्लेख किया गया है। प्रदेश में 52 प्रतिशत आवासों को टीम ने अच्छे श्रेणी का माना, 29.33 प्रतिशत को औसत और 14 प्रतिशत की हालत बेहद खराब मिली।
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