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......और इस तरह से बिखर गई टीम अन्‍ना

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Thu, 20 Sep 2012 01:28 PM IST
ultimately team anna collapsed
भ्रष्टाचार के खिलाफ देश भर की आवाज बन चुकी टीम अन्‍ना अंततः डेढ़ साल में ही बिखर गई। पिछले म‌ाह ही अन्ना हजारे और इनकी टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर-मंतर पर अनशन किया था। आंदोलन की सरकार द्वारा अनदेखी किए जाने से आहत टीम अन्‍ना ने देश को नया राजनी‌तिक विकल्प देने के वादे के साथ अनशन समाप्त किया था। हालांकि राजनी‌तिक दल बनाने के मुद्दे पर अन्ना हजारे और उनके साथियों के बीच असमति के स्वर लगातार सुनाई दे रहे थे। लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहि‌म पर टीम के सदस्यों की सहमति थी।
बुधवार को आंदोलन के अगले स्वरूप को लेकर ही अन्ना हजारे और उनके पुराने साथियों की बैठक हुई। लेकिन राजनीतिक दल के मुद्दे पर यह बैठक विफल रही और हजारे ने टीम के टूटने की औपचारिक घोषणा कर दी। बैठक के बाद हजारे ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि टीम अलग हो गई है। मैं किसी पार्टी या समूह में शामिल नहीं होऊंगा। मैं उनके प्रचार अभियान में शामिल नहीं होऊंगा। मैंने उन्हें अपना फोटो और नाम के इस्तेमाल से मना कर दिया है। आप खुद से लड़िए।’

अन्‍ना हजारे की राजन‌ीतिक दल बनाने से दूरी और अरविंद केजरीवाल से अलग होने की घोषणा कई मायनों में चौकाने वाली है। गौरतलब है कि अन्ना हजारे और उनकी पूर्ववर्ती टीम ने पिछले साल मौजूदा सरकार पर यह आरोप लगाया था कि वह करोड़ों रुपए खर्च कर उन्हें तोड़ने की कोशिश में लगी है लेकिन आज भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई मुद्दे पर ही अन्ना की अगुवाई वाला ‘टीम अन्ना’ का बिखर गई।

अन्ना हजारे ने पिछले माह आंदोलन की समाप्ति के बाद अपने ब्लॉग में लिखा था कि वह खुद पार्टी में नहीं आएंगे और न ही चुनाव लड़ेंगे लेकिन जनता के सामने राजनीतिक विकल्प देने की कोशिश जरूर करेंगे। उन्होंने अपने ब्लॉग में राजनीतिक दल बनाने को लेकर सहमति भी जताई थी। उन्होंने लिखा था कि पार्टी बनाने को लेकर वह डेढ़ साल तक देशभर में घूमेंगे और लोगों को जागरूक करेंगे। ब्लॉग में अन्ना ने यह तक बताया था कि राजनीतिक विकल्प के लिए कैसे ईमानदार लोगों का चयन किया जाएगा।

कल की बैठक के बाद एकाएक अन्ना हजारे के रुख में नया बदलावा दिखा। बैठक के बाद उन्होंने केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा कि अगर जनता का भारी समर्थन राजनीतिक दल के गठन के पक्ष में था तो फिर आज की बैठक बुलाई ही क्यों? उन्होंने अरव‌िंद केजरीवाल को नई पार्टी के लिए शुभकामनाएं भी दी। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोगों को लगता है कि पार्टी बनाने से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकती है लेकिन मैं पहले से कहता रहा हूं कि चुनाव नहीं लड़ूंगा और उन्हें मेरी शुभकामनाएं रहेंगी।'

सोशल नेटवर्किंग और ऑनलाइन सर्वे के खिलाफ हुए अन्‍ना
अन्ना हजारे ने कल पहली बार सोशल नेटवर्किंग की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सोशल नेटवर्किंग साइट पर उन्हें बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। उन्होंने टीम अन्ना के सदस्यों द्वारा राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए कराए गए जनमत सर्वेक्षण को सिरे से खारिज कर दिया है। 9 घंटे चली मैराथन बैठक के बाद अन्ना हजारे ने कहा कि उन्हें फेसबुक, ट्विटर, ईमेल, एसएमएस आदि पर भरोसा नहीं है।

गौरतबल है कि अगस्त में दिल्ली में 13 दिनों तक चला अन्ना का आंदालन सोशल नेटवर्किंग साइट के दम पर ही परवान चढ़ा था। दरअसल, पिछले दिनों ही भंग टीम अन्ना और इंडिया अगेंस्ट करप्शन की तरफ से एक सर्वे किया गया था जिसमें बताया गया कि सात लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। राजनीतिक दल बनाने के पक्ष में पड़े 76 फीसदी वोट देने की बात भी बताई गई। अरविंद केजरीवाल ने खुशी जाहिर की थी और कहा था कि अन्ना से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

आज अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के अलग हो जाने का मसला सोशल नेटवर्किंग साइटों पर छाया रहा। केजरीवाल के समर्थकों ने अन्ना पर सवाल उठाने वाले कई पोस्ट किए। ट्विटर पर केजरीवाल ने लिखा, ‘देश बिक रहा है...यह बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है...मैं अपने देश को बचाने के लिये कुछ भी करूंगा।’ हजारे की समर्थक किरण बेदी ने पलटवार किया, ‘अन्ना से राजनीतिक विकल्प का समर्थन करने की उम्मीद..जबकि उनका कभी इस ओर झुकाव नहीं था.. क्या यह किसी का गलत निर्णय था।’ इंडिया अगेंस्ट करप्शन के ट्विटर पेज पर अन्ना के फैसले को आड़े हाथों लेने वाले कई ट्वीट साझा किये गये।

अन्ना के इस बयान कि वह इंटरनेट सर्वेक्षण पर विश्वास नहीं रखते के जवाब में एक ट्वीट पोस्ट किया गया, ‘फेसबुक पर पांच हजार लोगों ने वोट किया और पांच लाख मिस्ड कॉल भी आए। आप इसे सिर्फ फेसबुक सर्वेक्षण कैसे कह सकते हैं।’
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