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इजरायली कंपनी को रक्षा बाजार में घुसाने की कोशिश

अरुणेश पठानिया/देहरादून

Updated Thu, 04 Oct 2012 12:59 PM IST
trying to introduce israeli company in indian defense market
रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के इंटरनल ऑडिट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इसकी रिपोर्ट के अनुसार देहरादून स्थित यंत्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान (आईआरडीई) ने साल 2009 में जिस विदेशी तकनीक को हासिल करने के लिए इजरायली कंपनी से करार किया, वह तकनीक डीआरडीओ के पास 2008 से ही है। इस तथ्य को इजरायली कंपनी की भारतीय रक्षा बाजार में घुसपैठ बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, आईआरडीई ने अनकूल्ड थर्मल साइट (हथियारों और युद्ध वाहनों पर स्थापित की जाने वाली दूरबीन) बनाने के इजरायल की एससीडी कंपनी के साथ 2009 में संयुक्त विकास परियोजना शुरू की है। इसके ऑडिट के दौरान आईआरडीई और इजरायली कंपनी के बीच किसी औपचारिक ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) के दस्तावेज नहीं मिले हैं। रिपोर्ट में इस प्रोजेक्ट के माध्यम से इजरायली कंपनी को भारतीय हथियारों के बाजार में प्रवेश दिलाने की कोशिश करार दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद अब कंट्रोलर ऑडिटर जनरल (कैग) ऑफ इंडिया ने भी डीआरडीओ का टेस्ट ऑडिट शुरू कर दिया है।

सूत्रों ने बताया कि 23 करोड़ लागत वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले अनकूल्ड डिडेक्टर तैयार करना है। इसके तहत थर्मल साइट की रेंज 4.5 किमी. करने के साथ ही उपकरण का साइज भी छोटा करना है। खास बात यह है कि डीआरडीओ के पास यह तकनीक 2008 से उपलब्ध है।

रिपोर्ट में आपत्तियां
-ज्वाइंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के नाम पर पुरानी विदेशी तकनीक का आयात
-इजरायली कंपनी के रक्षा बाजार में प्रवेश को आईआरडीई की मदद
-12वीं भारत इजरायल प्रबंधन काउंसिल मीटिंग के मिनट्स में इसका जिक्र नहीं
-डिफेंस एक्युजिशन काउंसिल के मानकों का अनुपालन नहीं

तकनीक पर सवाल
अनकूल्ड आईआर डिडेक्टर्स का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के उपयोग किए जाने वाले सैन्य थर्मल इमेजर में होता है। इजरायली कंपनी आईआर डिडेक्टर्स-17 पिक्सल पिच की क्षमता वाली 4.5 किमी. रेंज की साइट (दूरबीन) तैयार कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार इस श्रेणी में अब 12 पिक्सल पिच जियोमेट्री इस्तेमाल कर छोटे आकार के डिडेक्टर और इंफ्रारेड कैमरे विदेशों में बन रहे हैं। 17 पिक्सल क्षमता डीआरडीओ के पास 2008 से ही उपलब्ध है।

डीआरडीओ प्रमुख के अधिकारों में कटौती
रक्षा मंत्रालय की वित्तीय शाखा के इस आंतरिक ऑडिट की रिपोर्ट को डीआरडीओ गलत करार दे रहा है। लेकिन सितंबर में रक्षा मंत्रालय ने संगठन प्रमुख डॉ. वीके सारस्वत के वित्तीय अधिकारों में कटौती कर दी है।

और भी हैं आपत्तियां
-टी-72 टैंकों के माइन ध्वस्त करने के आठ करोड़ के प्रोजेक्ट पर आपत्ति
-एडीई बंगलुरू के 18.1 करोड़ के निर्भय प्रोजेक्ट की स्वीकृति पर सवाल
-नाग मिसाइल के प्रोडक्ट सपोर्ट एंड प्रोडक्ट इंप्रूवमेंट ऑफ नाग वेरन सिस्टम को अनुमति। जबकि पुरानी आईजीएमडीआर में भी नाग पर हो रहा है कार्य।  
-डीआरडीओ के आईईडी विस्फोटक पता करने की तकनीक पर खर्च अधिक, जबकि सेना द्वारा सस्ती दरों पर यही उपकरण अमेरिका से खरीदे जा रहे हैं।
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