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कांग्रेस की मान्यता रद्द करे चुनाव आयोगः स्वामी

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Sat, 03 Nov 2012 10:45 PM IST
Swamy moves EC to derecognise Cong om Herald loan issue
स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा स्थापित अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ को कांग्रेस के कर्ज देने पर उठा विवाद अब बड़ा हो गया है। इस मामले को उठाने वाले जनता पार्टी के प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने अखबार को ब्याजमुक्त कर्ज (90 करोड़ रुपये) की कांग्रेसी स्वीकारोक्ति के बाद चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
स्वामी ने अर्जी देकर कांग्रेस की मन्यता रद्द कर देने की मांग की और कहा है कि राजनीतिक दल के रूप में कांग्रेस चंदे से इकट्ठा धन कानूनन किसी कंपनी को कर्ज के रूप में नहीं दे सकती। स्वामी के इस कदम ने कांग्रेस को उलझा दिया है। हालांकि उसके तेवर आक्रामक हैं।

कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने शनिवार को मीडिया से कहा कि नेशनल हेराल्ड की प्रकाशक कंपनी एसोसिएट जर्नल्स प्रा.लि. को कर्ज देना हमारा ‘राजनीतिक धर्म’ था क्योंकि अखबार महात्मा गांधी और नेहरू के विचारों का प्रचार-प्रसार करता रहा है। साथ ही पार्टी ने यह कर्ज देकर अखबार से जुडे़ 700 लोगों के परिवारों की रोजी-रोटी को बचाया। वहीं कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि पार्टी इस मामले को चुनाव आयोग में पूरी ताकत से लड़ेगी।

स्वामी ने शनिवार को चुनाव आयोग में अपनी अर्जी दाखिल की। जिसमें कहा गया कि कांग्रेस ने एसोसिएट जर्नल्स प्रा.लि. को कर्ज देकर कानूनों का उल्लंघन किया। अत: उसकी मान्यता रद्द होनी चाहिए। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी चंदे की रकम को बतौर कर्ज देने पर कांग्रेस से जवाब मांगा है। जबकि कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि उसके लिए कौन सा काम राजनीति है और कौन सा गैर राजनीतिक यह दूसरे नहीं बल्कि कांग्रेस तय करेगी।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने शुक्रवार को नेशनल हेराल्ड को 90 करोड़ रुपए ब्याज मुक्त कर्ज देने की बात स्वीकार की थी। स्वामी का यह भी आरोप है कि एसोसिएट जर्नल्स को बाद में यंग इंडियन कंपनी को हस्तांतरित कर दिया गया। यंग इंडियन कंपनी में स्वामी के दावों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी है।

स्वामी ने कांग्रेस की मान्यता रद्द करने की दी गई अपनी अर्जी को पुख्ता करने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को दी गई टैक्स छूट रद्द कर उस पर जुर्माना लगाए जाने का उदाहरण दिया है। बीसीसीआई एक चेरिटेबल ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत है मगर उसने आईपीएल को व्यावसायिक कर्ज दिया था और इसी आधार पर उसकी टैक्स छूट रद्द कर जुर्माना ठोका गया था।

कांग्रेस के तर्क: यह ‘राजनीतिक धर्म’ है
- अखबार (नेशनल हेराल्ड) की मदद के लिए इसे चलाने वाली कंपनी को कर्ज दिया।
- 1937 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्थापित इस अखबार की स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय भूमिका थी। इसका ऐतिहासिक महत्व है।
- कांग्रेस ने एसोसिएट जर्नल्स प्रा.लि. को कंपनी एक्ट, 1956 की धारा 3 के तहत लोन दिया।
- एसोसिएट जर्नल्स गांधी-नेहरू के विचारों का प्रचार करता है। उसकी सहायता कांग्रेस का ‘राजनीतिक धर्म’ है।
- ब्याजमुक्त कर्ज को ‘व्यावसायिक गतिविधि’ कैसे कहा जा सकता है।
- यह कर्ज देकर नेशनल हेराल्ड से जुड़े 700 कर्मचारियों के परिवारों को तबाह होने से बचाया गया।

लेकिन सवाल यंग इंडियन का
कांग्रेस की सफाई के बावजूद विपक्षी उस यंग इंडियन कंपनी को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल के 76 फीसदी शेयर हैं। कांग्रेस ने कहा है कि यंग इंडियन ने एसोसिएटेड जर्नल्स का अधिग्रहण नहीं किया है। एसोसिएडेट जर्नल्स का अस्तित्व है। जबकि विरोधियों का तर्क है कि अगर कांग्रेस ने एसोसिएटेड जर्नल्स को बचाने के लिए 90 करोड़ रुपये का कर्ज दिया तो इसके शेयर उस यंग इंडियन कंपनी को कैसे मिल गए जिसमें सोनिया-राहुल के 38-38 फीसदी शेयर हैं?

अगर यह कंपनी भी कांग्रेस की ही है तो शेयर पार्टी के नाम क्यों नहीं हैं? उल्लेखनीय है कि स्वामी आरोप लगा रहे हैं कि नेशनल हेराल्ड की दिल्ली स्थित 1600 करोड़ रुपये की संपत्ति को कब्जा करने की नीयत से यह कर्ज दिया गया।

ऐसा लगता है कि यह कर्ज खास तौर पर रियल एस्टेट में धन लगाने के लिए दिया गया है और संभवत: ‘लापरवाहीपूर्ण’ मनी लांड्रिंग का मामला है।- निर्मला सीतारमन, भाजपा प्रवक्ता

कांग्रेस ने पार्टी गाइडलाइनों का सीधा उल्लंघन किया है। आरपीए की धारा 292ए से सी में राजनीतिक दलों द्वारा किसी कंपनी को ब्याज पर या ब्याजमुक्त कर्ज देने का कोई प्रावधान नहीं है। आयकर कानून के अनुसार भी कोई राजनीतिक दल किसी कंपनी को लोन नहीं दे सकता।- सुब्रमण्यम स्वामी, जनता पार्टी

यह कौन तय करेगा कि किसी पार्टी के राजनीतिक कार्य कौन-कौन से हैं? हमारे लिए हितकारी राजनीतिक काम हम खुद तय करेंगे। भाजपा को हम अपने राजनीतिक काम तय करने का हक नहीं दे सकते। कुछ पार्टियों के लिए केवल अफवाहें और अशांति फैलाना ही राजनीतिक कार्य हैं।-जनार्दन द्विवेदी, कांग्रेस महासचिव
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