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पेड़ों की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट हैरान

पीयूष पांडेय/नई दिल्ली

Updated Tue, 30 Oct 2012 08:47 AM IST
supreme court surprised on tree definition
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए पेड़ों को काटने की मंजूरी देने वाले आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने लिखने के बावजूद जारी नहीं किया क्योंकि उत्तर प्रदेश के वन विभाग की ओर से एक से दो इंच त्रिज्या के तने वाले पौधों को भी पेड़ों की श्रेणी में रखा गया। सर्वोच्च अदालत ने इस पर हैरानी जताते हुए पेड़ों की परिभाषा के बारे में पूछ लिया। स्पष्ट जवाब न मिलने पर अदालत ने अपना आदेश रोक लिया। कॉरिडोर का पहला चरण ताज ट्रिपेजियम जोन से गुजरेगा, जो 76 किलोमीटर का क्षेत्र है और इसमें 4313 पेड़ काटे जाने हैं।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआई) को पेड़ काटने की मंजूरी देने के लिए जस्टिस डीके जैन व जस्टिस मदन बी लोकुर की पीठ अपना आदेश लगभग पूरा कर चुकी थी। लेकिन तभी पीठ को पेड़ों की उस परिभाषा पर आश्चर्य हुआ, जिसमें वन विभाग ने एक से दो इंच त्रिज्या के तने वाले पौधों को पेड़ों की श्रेणी में रखा है।

पीठ ने विभाग के अधिवक्ता से पूछा कि आप पौधों को भी पेड़ गिन रहे हैं। क्या आप हमें बताएंगे कि वन्य अधिनियम के तहत पेड़ों की परिभाषा के अंतर्गत पौधों को इसमें शामिल किया जा सकता है। यह सवाल अदालत ने उत्तर प्रदेश वन विभाग की ओर से डीएफसीसीआई को दिए गए उस प्रस्ताव पर इशारा करते हुए किया, जिसमें एक पेड़ की कटाई के लिए सौ रुपये और दो पेड़ों के पौधरोपड़ के लिए दो सौ रुपये का भुगतान करने को कहा गया है।

सर्वोच्च अदालत ने पेड़ों की परिभाषा के मसले पर स्पष्ट जवाब न मिलने पर हिदायत देते हुए शुक्रवार तक के लिए मामले की सुनवाई टाल दी और इस पर समुचित स्पष्टीकरण देने को कहा। पीठ ने इस मसले पर केंद्रीय उच्चाधिकार समिति (सीईसी) की नियुक्ति की थी। हालांकि फ्रेट कॉरिडोर को जनहित के लिए उपयोगी करार देते हुए सीईसी ने पेड़ों को काटे जाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है।

डीएफसीसीआई ने पेड़ों को काटे जाने के एवज में 25,000 पेड़ों को लगाने का आश्वासन दिया है। हालांकि वन्य भूमि के उपयोग के बदलाव के लिए कानून प्रावधानों की मंजूरी लेने की शर्त रखी गई है, जो वन्य अधिनियम के तहत मुआवजा राशि के भुगतान के साथ प्रयोग में लाई जा सकती है।
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