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'कैग कोई मुनीम नहीं, जो सिर्फ सरकार का आर्थिक चिट्ठा बनाए'

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Tue, 02 Oct 2012 01:39 AM IST
supreme court said cag duty to see proper use of resources
यूपीए सरकार के निशाने पर चल रहे नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के कामकाज को जायज करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कैग कोई मुनीम नहीं है, जो सिर्फ सरकार के खातों का आर्थिक चिट्ठा तैयार करे। कैग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका कर्तव्य संसाधनों के सही उपयोग को देखना है। सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी कैग के अधिकारों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए की। याचिका में कोल ब्लॉक आवंटन पर पेश रिपोर्ट पर सवाल उठाया गया था।
जस्टिस आरएम लोढ़ा व जस्टिस एआर दवे की पीठ ने कहा कि कैग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े राजस्व आवंटन पर लेखा परीक्षण करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता व अर्थशास्त्री अरविंद गुप्ता की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि कैग एक संवैधानिक संस्था है, जो राजस्व आवंटन और अर्थव्यवस्था से जुड़े मामलों की पड़ताल कर सकता है।

पीठ ने कहा कि कैग कोई मुनीम नहीं है, जिसे सिर्फ सरकार के खातों का आर्थिक चिट्ठा तैयार करना चाहिए। यह संसद का काम है कि वह कैग के नतीजों को स्वीकार करे या फिर उसे अस्वीकार कर दे। पीठ ने कहा कि संसाधनों कासही उपयोग हुआ है या नहीं, यह देखना कैग का कर्तव्य है। सरकार की ओर से किए गए राजस्व आवंटनों से जुड़े उसके लेखा परीक्षण पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

याचिका सुनवाई योग्य नहीं
सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संतोष पॉल से कहा कि याचिका में कैग के अधिकार पर उठाए गए सवाल सुनवाई योग्य नहीं हैं। संविधान के कई प्रावधानों की व्याख्या करते हुए पीठ ने कहा कि कैग एक संवैधानिक संस्था है, जिसकी रिपोर्ट पर संसद या संबंधित राज्य विधानसभा को निर्णय लेना होता है। इन रिपोर्ट पर कार्रवाई करने के बारे में फैसला भी संसद या संबंधित विधानसभाओं को ही करना होता है।

क्या कहा गया था याचिका में
अर्थशास्त्री अरविंद गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि कैग ने कोल ब्लॉक आवंटन में अपने अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर रिपोर्ट तैयार की, जो असंवैधानिक है। अदालत से इस बाबत कैग को दायरे में रहने का निर्देश जारी करने की मांग की गई थी।
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