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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री के भाई से किया जवाब तलब

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Tue, 16 Oct 2012 12:32 AM IST
Supreme Court notices to the former minister's brother
हाथरस के हरि आई हॉस्पिटल के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बसपा सरकार में मंत्री रहे रामवीर उपाध्याय के छोटे भाई विनोद उपाध्याय को नोटिस जारी किया है। सर्वोच्च अदालत में इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के 10 जून, 2010 के आदेश को चुनौती दी गई है। 
हाईकोर्ट ने जिला जज के आदेश पर रोक लगाते हुए अस्पताल को चलाने की जिम्मेदारी उसके ट्रस्ट की कमेटी को दी थी। जबकि याचिकाकर्ता का कथित आरोप है कि इस फर्जी कमेटी का गठन पूर्व मंत्री के भाई व परिवार के सदस्यों ने अस्पताल पर कब्जा जमाने को किया था। मगर जिला अदालत ने विनोद उपाध्याय को अस्पताल के ट्रस्ट का सदस्य मानने से इनकार कर दिया और दस्तावेज को भी फर्जी करार दिया। हालांकि हाईकोर्ट ने इस आदेश को पलट दिया। तब से अस्पताल बंद पड़ा है।

जस्टिस आफताब आलम की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता सौरभ अग्रवाल की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1952 में इस अस्पताल का उद्घाटन किया था। समाजसेवी व नेत्र चिकित्सक डॉ. हरवंश लाल ने ट्रस्ट का गठन कर इस अस्पताल की शुरुआत की थी।

इसके बाद उनके दत्तक पुत्र ओम शर्मा ने अस्पताल का कार्यभार संभाला, लेकिन उन पर कई आरोप लगे जिसके बाद मामला अदालत में पहुंचा। इसी दौरान नवंबर, 2007 में पचास करोड़ की इस संपत्ति पर तत्कालीन मंत्री और उनके परिवार ने एक फर्जी ट्रस्ट डीड तैयार करा ली। इसी बीच याचिकाकर्ता ने सार्वजनिक ट्रस्ट के प्रबंधन के लिए रिसीवर नियुक्त करने का आवेदन निचली अदालत से किया।

अधिवक्ता ने बताया कि अगस्त, 09 अदालत ने जिलाधिकारी महामायानगर को रिसीवर के तौर पर नियुक्त कर दिया। इस आदेश के खिलाफ विनोद उपाध्याय ने हाईकोर्ट में अपील की जो खारिज कर दी गई। वहीं निचली अदालत ने मंत्री के भाई को समिति का सदस्य मानने से भी इनकार कर दिया और डीड को भी फर्जी दस्तावेज करार दिया।

लेकिन हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से कैविएट दायर किए जाने के बावजूद एकपक्षीय आदेश जारी कर दिया। पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए सभी प्रतिपक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
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