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बीएचयू कराए छात्रसंघ चुनाव: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Tue, 11 Dec 2012 11:14 PM IST
supreme court bhu student election
सुप्रीम कोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक छात्रसंघ चुनाव कराने का निर्देश दिया है।
हालांकि शीर्षस्थ अदालत ने बीएचयू की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया। बीएचयू ने छात्रसंघ चुनाव के संबंध में अध्यादेश जारी किया था जिसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था।

चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष बीएचयू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव पेश हुए। राव ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए तमाम दलीलें पेश कीं। पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया और विवि को हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक छात्रसंघ चुनाव कराने का निर्देश दिया।

राव ने तर्क दिया कि छात्रसंघ चुनाव में होने वाले खूनी संघर्ष के चलते बीएचयू ने अध्यादेश जारी कर शांतिपूर्ण चुनाव की व्यवस्था की थी। विश्वविद्यालय चुनाव में दो लोगों की मौत हुई थी। इन्हीं कारणों से बीएचयू की ओर से अध्यादेश लाया गया था। अदालत से गुजारिश है कि इस पहलू को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाएं।

पीठ ने रोक लगाने से इंकार करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय छात्रसंघ के चुनाव कराए। अदालत इस मसले को विचारार्थ स्वीकार करती है और सभी पक्षों पर गौर करने के बाद ही कोई आदेश जारी करेगी। याद रहे कि जस्टिस आरएम लोढ़ा व जस्टिस अनिल आर दवे की पीठ ने हाईकोर्ट के 20 सितंबर के आदेश के खिलाफ बीएचयू की ओर से दायर याचिका को तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष भेजने का आदेश जारी किया था।

बीएचयू ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें कुलपति को काउंसिल का संरक्षक, कुलपति की ओर से नामित किए गए प्रोफेसर को काउंसिल का चेयरमैन और विश्वविद्यालय के डीन को वाइस चेयरमैन के पद पर नामित करने का अध्यादेश जारी किया गया था।

इसके चलते छात्रसंघ चुनाव सिर्फ महासचिव और सचिव के पद पर आयोजित किए जा सकते थे। जबकि छात्रों की मांग थी कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों में ऐसी कोई व्यवस्था करने का प्रावधान नहीं है। बीएचयू के इस अध्यादेश के खिलाफ छात्रनेता विकास सिंह और प्रवीन कुमार सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसके बाद हाईकोर्ट ने छात्रों की मांग को जायज करार देते हुए अध्यादेश को रद्द कर दिया।

गौरतलब है कि बीएचयू ने याचिका में कहा है कि विश्वविद्यालय को यह अधिकार प्राप्त है कि वह छात्रसंघ चुनाव के संबंध में अध्यादेश जारी करे। साथ ही बीएचयू में छात्रसंघ चुनाव के दौरान पहले हुए खूनी संघर्षों का भी हवाला दिया है।
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