आपका शहर Close

'प्रधानमंत्री जी, पैसा पेड़ों पर नही उगता, वो कोयले में उगता है'

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्‍क

Updated Sat, 22 Sep 2012 12:59 PM IST
Speech-Of-PM-criticizes-on-twitter-and-facebook
डीजल में की गई मूल्य वृद्घि और खुदरा में निवेश के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भाषण आम जनता को कतई रास नहीं आया है। सोशल नेट‌वर्किंग साइट्स पर उनके बयान 'पैसे पेड़ों पर नहीं उगते' के विरोध में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। ट्विटर और फेसबुक पर कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश पर चुटीली प्रतिक्रियाएं भी दी हैं।
कड़े कदम उठाने की बात की भी आम लोगों ने आलोचना की है। दरअसल प्रधानमंत्री की जनता को समझाने की कोशिश लोगों को पसंद नहीं आई है। प्रकाश शर्मा ने ट्वीट किया है, 'प्रधानमंत्री ममता बनर्जी को तो समझा नहीं सके तो जनता को कैसे समझा सकते हैं।'

'पैसे पेड़ों पर नहीं उगते' पर आईएसी ने टिप्पणी की ह‌ै, 'जी प्रधानमंत्री जी, पैसा पेडों पर नही उगता, वो कोयले में उगता है, चारे में उगता है, बोफोर्स में उगता है, 2G में उगता है, राष्ट्रमंडल खेलों में उगता है, आपकी पार्टी अध्यक्षा के घर में उगता है, आपके मंत्रियों के घर में उगता है...।' इस बयान पर ही उमा शंकर चौधरी की प्रति‌क्रिया है, 'पैसे पेड़ पर नहीं उगते। मैंने अपनी पूरी जिन्दगी में प्रधानमंत्री के भाषण में इस तरह की भाषा नहीं सुनी थी। हद ही हो गई। मनमोहन जी का भाषण कौन लिखता है भाई।'

प्रधानमंत्री के कड़े फैसले लेने के बयान पर चुटकी लेते हुए दिलीप खान ने फेसबुक पर लिखा है, '21 साल बाद भी वही लाइन, वही बात। 24 जुलाई 1991 को भी मनमोहन सिंह ने कहा था, 'अब कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है', आज फिर से यही वाक्य दोहराया।'

ट्विटर पर‌ स्मिता नायक ने टिप्पणी की है, 'पैसा पेड़ों पर नहीं उगता तो फिर सरकार बिना पैसे के कोयला और 2जी क्यों बांट देती है प्रधानमंत्री जी।" ट्विटर पर‌ ही किशोर बड़थल ने व्यंग्य किया है, 'मैं हमेशा अपने स्टूडेंट्स को समझाता रहता हूं कि आपके पास डिग्री है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपके पास नॉलेज भी होगा। मनमोहन सिंह इसके उदाहरण हैं।'

प्रधानमंत्री के भाषण पर फेसबुक पर कुछ काव्यात्मक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं। जैसे धीरेश सैनी ने लिखा है, एफडीआई पर पीएम की 'आम आदमी' से अपील पर दुष्यंत का शेर याद आ रहा है-

उनकी अपील है कि उन्हें हम मदद करें
चाकू की पसलियों से गुज़ारिश तो देखिये

श्याम उदय 'कोरी' ने लिखा है-
मंहगाई रूपी पटकनी से, चित्तम चित्त है जनता
मगर अफसोस, कुछ शैतां ... अब भी मजे में है?

प्रधान मंत्री के भाषण पर आलोक दीक्षित फेसबुक पर लिखते हैं, 'प्रधानमंत्री महोदय से क्या उम्मीद की जाए जो एफडीआई को लेकर प्रधानमंत्री की हैसियत से कम, किसी वालमार्ट कंपनी के पीआर की हैसियत से अधिक बोलते दिखाई दिए।'
Comments

स्पॉटलाइट

'पद्मावती' विवाद पर दीपिका का बड़ा बयान, 'कैसे मान लें हमने गलत फिल्म बनाई है'

  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

'पद्मावती' विवाद: मेकर्स की इस हरकत से सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी नाराज

  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

कॉमेडी किंग बन बॉलीवुड पर राज करता था, अब कर्ज में डूबे इस एक्टर को नहीं मिल रहा काम

  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

हफ्ते में एक फिल्म देखने का लिया फैसला, आज हॉलीवुड में कर रहीं नाम रौशन

  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

SSC में निकली वैकेंसी, यहां जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

Most Read

पुरुषों के आत्महत्या करने की खबर कभी नहीं सुनी : मेनका 

Never heard of men committing suicide, Says Minister Maneka Gandhi
  • शुक्रवार, 30 जून 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!