आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

ख्यालों में गुम रहते हैं बरेली के आधे स्कूल टीचर

जनार्दन सिंह/बरेली

Updated Mon, 22 Oct 2012 11:15 AM IST
school teacher of bareilly interact less with students
कक्षा में शिक्षक की मुखरता ही विद्यार्थी को प्रभावित करती है। यही एक खूबी होती है, जो विद्यार्थियों को किसी भी विषय को ज्यादा बेहतर ढंग से समझाने में मददगार बनती है या उन्हें किसी समस्या से उबरने का हौसला देता है। लेकिन रूहेलखंड विश्वविद्यालय में हुए एक नवीनतम शोध में पाया गया है कि बरेली के करीब आधे शिक्षक आजकल कक्षाओं में विद्यार्थियों के बीच मुखर ही नहीं रहते। वह खुद में ही रमे रहते हैं। इससे छात्र की पढ़ाई प्रभावित होती है।
डीन प्रो. एनपी सिंह के निर्देशन में मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ एजूकेशन के प्रवक्ता अनिल कुमार दीक्षित ने यह शोध किया है। अनिल ने बरेली जनपद के 260 स्कूलों में छठीं से आठवीं कक्षा में पढ़ाने वाले कुल 288 शिक्षकों पर यह अध्ययन किया। इन स्कूलों में 156 हिंदी माध्यम के थे और 104 अंग्रेजी माध्यम के।

इन स्कूलों में शिक्षकों के पढ़ाने के तौर-तरीके और अंदाज का मूल्यांकन करने को अनिल ने हर शिक्षक की कक्षा में अंतिम कतार की बेंच पर बैठकर आब्जर्व किया। पाया कि हिंदी माध्यम के स्कूलों में 52 फीसदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में 38 फीसदी शिक्षक मुखर ही नहीं रहते हैं। ऐसे शिक्षक कक्षा में किसी भी विषय पर थोड़ी देर सपाट अंदाज में बोलते हैं या फिर छात्र को खड़ा कर किताब पढ़ाते हैं। अधिकांश समय ये शांत रहते हैं या खुद में खोए रहते हैं। उनकी कक्षाएं पूरे समय शोरशराबे में डूबी मिलीं।

अनिल के शोध में यह भी पाया गया कि हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में जो शिक्षक मुखर थे, उनकी कक्षाओं में पूरे समय शांति रहती है। ऐसे शिक्षक पढ़ाने के दौरान कक्षा में पूरे समय विद्यार्थियों को ज्यादा बेहतर ढंग से विषय को समझाने के लिए अपने चेहरे की भावभंगिमा बदलते हैं। कभी हाथ हवा में लहराकर या उंगलियों को नचाकर और कभी बालों को झटकाते हैं। वे बेंचों की कतार के बीच हौले-हौले लगातार चहलकदमी करते हैं। इससे कक्षा में बैठे छात्र पूरे समय उनकी ओर आकृष्ट रहते हैं।

शोध का रिजल्ट
-हिंदी माध्यम के स्कूलों में पुरुष ज्यादा (68 फीसदी) मुखर मिले, जबकि महिलाएं कम (42 फीसदी)
-अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पुरुष शिक्षक कम (44 फीसदी) और महिला शिक्षक ज्यादा (56 फीसदी) मुखर मिलीं
  • कैसा लगा
Comments

स्पॉटलाइट

यहां हुआ अनोखे बच्चे का जन्म, गांव वालों का डर 'कहीं ये एलियन तो नहीं'

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

कोहली और KRK पीते हैं ऐसा खास पानी, एक बॉटल की कीमत 65 लाख रुपये

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

कहीं गलत तरह से शैम्पू करने से तो नहीं झड़ रहे आपके बाल, ये है सही तरीका

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

मसाज करवाकर हल्का महसूस कर रहा था शख्स, घर पहुंचते हो गया पैरालिसिस

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

यहां खुद कार चलाकर ऑपरेशन थियेटर में जाते हैं बच्चे

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

Most Read

पुरुषों के आत्महत्या करने की खबर कभी नहीं सुनी : मेनका 

Never heard of men committing suicide, Says Minister Maneka Gandhi
  • शुक्रवार, 30 जून 2017
  • +

'विराट' के बाद नौसेना से एल्बाट्रॉस विमान की भी विदाई

India Navy Adieu Farewells To Albatross Patrol Aircraft
  • बुधवार, 8 मार्च 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!