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महाकुंभ की रक्षा के लिए काल भैरव का आह्वान

इलाहाबाद/ब्यूरो

Updated Thu, 06 Dec 2012 08:14 AM IST
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महाकुंभ की सुरक्षा के लिए सेना बंकर बना रही है। बीएसएफ और आईटीबीपी के जवान नियंत्रण रेखा तय कर रहे हैं, लेकिन इस महापर्व की कुशलता के लिए अखाड़ों और संत महात्माओं की तैयारी इससे अलग और अनूठी है।
अखाड़ों और संत महात्माओं को भरोसा है कि कालभैरव ही इतने बड़े अभियान की रक्षा कर सकते हैं लिहाजा उन्हें जगाने और ध्वजदंड मेला भूमि में स्थापित करने का उपक्रम शुरू हो गया है।

जूना अखाड़े के संत महाकुंभ की सफलता एवं सुरक्षा के लिए कालभैरव का आह्वान कर रहे हैं। त्रिवेणी तट पर गुप्त अनुष्ठान पूजन का उपक्रम बुधवार को शुरू हो गया।

पूजा का क्रम पूरा होने के बाद बृहस्पतिवार को धर्मध्वज का अनुष्ठान होगा। संतों का दावा है कि उनके अनुष्ठान से कालभैरव प्रसन्न होंगे और महाकुंभ के ऊपर मंडराने वाले खतरे दूर होंगे।

अगहन कृष्ण पक्ष की अष्टमी यानी बृहस्पतिवार को अखाड़े की तरफ से मेला क्षेत्र में धर्म ध्वजा फहराने के साथ ही उनकी नजर में मेला क्षेत्र कालभैरव के हवाले हो जाएगा। अनुष्ठान में शामिल हो रहे नागा संतों को भरोसा है कि अनुष्ठान से काल भैरव जगेंगे, प्रसन्न होंगे और उनसे मेले की रक्षा की प्रार्थना की जाएगी।

मान्यता है कि कालभैरव भगवान शिव के दंडाधिकारी हैं, उनके भय से मेला में किसी प्रकार के अनिष्ट की संभावना नहीं रहेगी।

काशी से आएंगे अभिमंत्रित कलश
मान्यता के मुताबिक भगवान शिव के दंडाधिकारी और काशी के कोतवाल कालभैरव के हवाले मेला क्षेत्र करने के लिए जो अनुष्ठान हो रहा है, उसके लिए काशी से ही अभिमंत्रित कलश मंगाए गए हैं।

जूना अखाड़े के धर्मध्वज के नीचे कलश स्थापित किए जाएंगे। अखाड़े के सचिव प्रेमगिरि ने बताया कि बुधवार को काशी के कोतवाल भैरव के दरबार में नागा संतों द्वारा तांबे के तीन कलश, जिन में गंगाजल, गुड़ और गेहूं भरा है, अभिमंत्रित किए गए हैं। इसे लेकर नागा संत सुबह मेला क्षेत्र पहुंचेंगे।

धर्म ध्वज खड़ी करने के बाद देवता का आह्वान, पूजन और अनुष्ठान होगा। उसके बाद कलश स्थापित कर मेला क्षेत्र दंडनायक के हवाले कर दिया जाएगा। जूना अखाड़े के राष्ट्रीय सचिव हरिगिरि का दावा है कि भैरव के भय से सारी बाधाएं खुद भाग जाती हैं। मेले की सकुशलता के लिए उनका आह्वान जरूरी है।

बावन जनेऊ से सजेगा ध्वजदंड
नागा दीक्षा से लेकर शाही स्नान के लिए प्रस्थान करने से पहले अखाड़े के सारे अनुष्ठान ध्वजदंड के नीचे ही संपन्न होंगे। ध्वज दंड अखाड़े की बावन मढ़ियों का प्रतीक बावन जनेऊ बांधा जाएगा। दंड और ध्वजा भगवा रंग में रंगी होगी।
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