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गंगा के सहारे अपने उद्धार का रास्ता तलाशने में जुटा संघ

अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ

Updated Mon, 26 Nov 2012 11:24 AM IST
rss wants to improve their image through ganga campaign
गंगा के सहारे संघ परिवार अपने भी उद्धार का रास्ता तलाशने में जुटा है। वह इस अभियान के जरिये न सिर्फ हिंदू समाज में पहुंच व पकड़ बनाने के काम में जुटा है बल्कि उसकी कोशिश साख सुधारने की है। उसका प्रयास है कि हिंदुओं के बीच उसका पहले जैसा भरोसा जम जाए। उसके अभियान से भाजपा को भले ही लाभ मिले लेकिन यह आरोप न लगे कि संघ सिर्फ भाजपा के लिए काम करता है।
अभियान का नाम ‘गंगा समग्र’ रखा गया है तो नारा दिया गया है, ‘अविरल गंगा-निर्मल गंगा।’ मांग है कि जहां बांध बने हैं वहां कम से कम गंगा की एक धारा को जरूर मुक्त किया जाए। जिससे देश भर में गंगा अविरल बहती रहे। साथ ही लोगों को गंगाजल मिलता रहे। इसके लिए दो दिसंबर को गंगोत्री से गंगासागर तक 2515 किलोमीटर तक मानव श्रंखला बनवाकर लगभग 25 लाख लोगों को गंगा की रक्षा का संकल्प दिलाने की तैयारी है।

दरअसल, संघ के रणनीतिकारों को अब इस बात का अहसास हो रहा है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद जिस तरह उसने जरूरत से ज्यादा राजनीतिक दिलचस्पी दिखाई उसके चलते संघ की साख को काफी धक्का लगा है। नतीजतन हिंदू समाज के सभी वर्गों के बीच उसकी पहुंच व पकड़ कमजोर हुई है। पहले संघ की नीतियों से असहमति रखने वाले भी संघ की विश्वसनीयता व साख पर सवाल खड़े नहीं करते थे लेकिन आज उन लोगों का भी पहले जैसा भरोसा नहीं रहा जो नीतियों से सहमत व समर्थक थे।

इसीलिए संघ पिछले लगभग पांच वर्षों से अपनी छवि को किसी राजनीतिक दल के हितैषी के बजाय ‘हिंदू हितचिंतक’ के रूप में बनाने की कोशिश कर रहा है। विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा, गाय रक्षा-गांव रक्षा, धर्मान्तरण विरोध जैसे अभियान उसकी इसी कोशिश का हिस्सा रहे हैं।

अभियान के समन्वयक बृजेन्द्र पाल सिंह भी जो कुछ कहते हैं, उससे भी संघ की चिंता उजागर हो जाती है। वह कहते हैं कि अभियान पूरी तरह गैर राजनीतिक है। गंगा के सवाल को हम राजनीति में नहीं उलझाना चाहते। गंगा से देश का अस्तित्व जुड़ा है। इसीलिए गंगा की रक्षा को इस बार सभी राजनीतिक दलों, उनके सांसदों, विधायकों व नेताओं से संपर्क किया गया है कि वे देश को पहचान देने वाली इस राष्ट्रीय नदी का अस्तित्व बचाने में सहयोग दे। सभी ने सहयोग व समर्थन का भरोसा दिया भी है।

उन्होंने कहा कि उमाभारती इसलिए सामने दिख रही हैं क्योंकि वह भाजपा से पहले गंगा के अभियान से जुड़ी हैं। कोशिश है कि इस अभियान के सहारे हम गंगा के दोनों किनारों पर स्थित 20-25 किमी. अंदर तक स्थित गांवों के लोगों के तक पहुंचे और उन्हें गंगा की अविरलता व निर्मलता बनाए रखने के काम में भागीदार बनाएं। साफ है कि संघ का पूरा ध्यान हिंदू समाज के बीच अपनी साख बनाने पर है।

तैयारियां मानव श्रंखला बनाने की
वाराणसी और दिल्ली में दो शिविर लगाकर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है। लोगों से संपर्क और श्रंखला बनवाने के लिए 400 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक 2515 किलोमीटर तक गंगा के किनारे 15-20 किमी. की दूरी तक स्थित गांवों व नगरों में लोगों से संपर्क करके उन्हें गंगा की रक्षा के लिए 2 दिसंबर को गंगा के तट पर आकर मानव श्रंखला बनाने में सहयोग देने के लिए पीला चावल बांटा जा रहा है।

गंगोत्री से गंगासागर तक पड़ने वाले पांच प्रदेशों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल में तथा इनके अंतर्गत आने वाले 56 जिलों और 270 ब्लाकों में कमेटियां बनाई गई हैं। 28 बड़े नगरों में भी व्यापक संपर्क किया जा रहा है। गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा के एक किनारे मानव श्रंखला बनाने के लिए लगभग 25-26 लाख लोगों की जरूरत होगी। इसके लिए 28 बड़े नगरों में भी व्यापक संपर्क किया जा रहा है। हर 10 किमी. पर एक इंचार्ज बनाया गया है। इंचार्ज के अधीन 100 टोली नायक होंगे। प्रत्येक टोली नायक को अपनी टोली में सौ लोगों को 2 दिसंबर को गंगा के तट पर लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस तरह होंगे एकत्र और बनेगी मानव श्रंखला
दो दिसंबर को सभी लोगों से दोपहर 12 बजे तक अपने नजदीक के गंगा तट पर पहुंचने का न्योता दिया जा रहा है। ठीक 12 बजे गंगा पूजन शुरू हो जाएगा। इसके बाद तट पर मौजूद लोगों को वहां का टोली नायक गंगा पर संकट, गंगा का महत्व और गंगा की रक्षा के अभियान का उद्देश्य बताया जाएगा। साथ ही संकल्प पत्र भरवाया जाएगा। उनसे गंगा में किसी प्रकार की गंदगी न गिरने देने का आग्रह किया जाएगा।

ठीक 1 बजे टोली नायक शंख बजाएंगे। शंखध्वनि के साथ एकत्र लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़कर श्रंखला बनाएंगे। यह श्रंखला 1.05 बजे से 1.20 तक बनी रहेगी। इस दौरान नारे लगेंगे, ‘हर-हर गंगे, अविरल गंगे, अविरल गंगे-निर्मल गंगे’ ‘जय गंगा मैया की’। बृजेन्द्र पाल कहते हैं कि गंगा की रक्षा सिर्फ कानून बनाकर नहीं की जा सकती जब तक कि गंगा के किनारे लोग जागरूक नहीं होंगे। इन्हें जागरूक करने की यह कोशिश है।

बताए जाएंगे यह तथ्य
लोगों को बताया जाएगा कि बिहार में किस तरह पटना मेडिकल कालेज का कचरा गिरकर गंगा को प्रदूषित कर रहा है। कानपुर की टेनरियों से गंगा के प्रदूषित होने की बात तो सभी करते हैं लेकिन वहां का टी.बी. चिकित्सालय भी कानपुर में गंगा के जल को कम जहरीला नहीं बना रहा है। उन्नाव में गंगा के किनारे बनी चर्बी गलाने की भट्ठियां किस तरह गंगा की पवित्रता को नष्ट कर रही हैं।

नरौरा, फरक्का व टिहरी बांधों के कारण किस तरह गंगा का ब्रह्म द्रव्य (बैक्टीरिया नष्ट करने की क्षमता) खत्म होता जा रहा है। यह भी बताया जाएगा कि विकास के नाम पर राजनीतिक दलों ने किस तरह गंगा की अविरलता का बांधों के जरिये बांधा है। इससे किस तरह गंगा को ही नहीं भारत की संस्कृति के लिए भी खतरा खड़ा किया जा रहा है।
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