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लोकपाल की बजाय सीवीसी को मजबूत करें: कुरैशी

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Sat, 03 Nov 2012 09:55 PM IST
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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एसवाई कुरैशी ने लोकपाल की अपेक्षा सीवीसी को अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा सीवीसी के पास किसी के भी खिलाफ जांच कराने के साधन तो हैं, मगर शक्तियां नहीं हैं। यदि सीवीसी को चुनाव आयोग के समान संवैधानिक दर्जा मिल जाए तो भ्रष्टाचार से अच्छी तरह निपटा जा सकता है। उन्होंने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सभी जांच एजेंसियों में तालमेल पर भी जोर दिया।
11वें अखिल भारतीय लोकायुक्त सम्मेलन में कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग के समान सीवीसी के पास जांच कराने के लिए अपनी एजेंसी व पूरा कार्यबल है, मगर उसके पास शक्तियां नहीं हैं। उन्होंने कहा यदि सीवीसी को संवैधानिक दर्जा देकर स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए तो वह भ्रष्टाचार से निपटने में प्रस्तावित लोकपाल से बेहतर काम कर सकता है।

सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन ने कहा कि हर विभाग के पास किसी भी मामले में ठोस सूचना होती है, मगर उनमें तालमेल का अभाव होने के कारण काम नहीं हो पाता। यदि सभी एजेंसियों में तालमेल हो तो अच्छे नतीजे निकल सकते हैं। उन्होंने कहा भ्रष्टाचार को खत्म करने में लोकायुक्त की भूमिका महत्वपूर्ण है।

मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा ने आज सरकारी संस्थाओं पर सूचना के अधिकार कानून के लागू होने के सात साल बाद भी कानून में प्रदत्त स्वत: खुलासे के प्रावधानों पर अमल नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा आरटीआई में हर सरकारी संस्था को विभिन्न सूचनाओं को जाहिर करने के लिए अनिवार्य प्रावधान है। लेकिन लगभग सभी सरकारी संस्थाएं इन अनिवार्य जरूरत को पूरा कर पाने में नाकाम रही हैं।

राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्य अरुणा राय ने कहा कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए व्हिसल ब्लोअर कानून, शिकायत निवारण कानून जैसे अन्य सहायक कानून बनाने की जरूरत है। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश टीएस ठाकुर, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, जस्टिस बीएस चौहान, जस्टिस कैलाश गंभीर, पूर्व मंत्री अरुण शौरी, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय, लोकायुक्त मनमोहन सरीन आदि ने भी अपने विचार रखे। सभी ने एक सुर में कहा कि मात्र आर्थिक विकास से देश की उन्नति नहीं हो सकती, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाई जानी चाहिए।

पारदर्शिता ही तेज विकास की कुंजी: कैग
भ्रष्टाचार पर चिंतित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय ने कहा है कि बिना जवाबदेही और पारदर्शिता के देश ऊंची विकास दर हासिल नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में भ्रष्टाचार का मुद्दा कोई नया नहीं है। देश को इससे असरदार तरीके से निपटने की जरूरत है, ताकि 8 फीसदी की ऊंची विकास दर हासिल की जा सके। इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

केजरीवाल का जनलोकपाल कुछ ज्यादा ही कठोर
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एपी शाह ने पूर्व की टीम अन्ना की ओर से पेश किए गए जन लोकपाल बिल पर सवाल उठाए हैं। खास बात यह है कि जस्टिस शाह अरविंद केजरीवाल की ओर से बनाए गए इंडिया अंगेस्ट करप्शन के आंतरिक लोकपाल के भी सदस्य हैं।

लोकायुक्तों के सम्मेलन में शिरकत कर रहे जस्टिस शाह ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए मजबूत लोकपाल बनाने की वकालत की। लेकिन जनलोकपाल बिल की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि इसके कई प्रावधान संविधान के मुताबिक नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि मैं केजरीवाल के जनलोकपाल के पक्ष में नहीं हूं क्योंकि यह कुछ ज्यादा ही कठोर है।  

छाए रहे अन्ना हजारे
सम्मेलन में भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता लाने वाले अन्ना हजारे छाए रहे। सभी वक्ताओं ने कहा यदि देश में भ्रष्टाचार खत्म करना है तो आम लोगों को खुद पहल करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा हजारे ने आम लोगों को जागरूक किया है और लोग अपने अधिकार व शक्तियों को समझने लगे हैं। अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने केजरीवाल के संघर्ष को समर्थन न देने की बात करते हुए कहा कि यह अलग बात है कि अन्ना के बाद आंदोलन किस दिशा में है। सभी वक्ताओं का मत था कि यदि लोग रिश्वत देना बंद कर दें तो भ्रष्टाचार खुद समाप्त हो जाएगा।

भ्रष्टाचार से निपटने में लगी सभी एजेंसियों का एक संघ बनाया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचार के दानव से असरदार तरीके से निपटा जा सकेगा। व्यवस्था में लोगों का भरोसा कायम करने में भी मदद मिलेगी।--आर श्रीकुमार, विजिलेंस कमिश्नर
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