आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

मारन को क्लीन चिट देने की होगी जांच

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Fri, 02 Nov 2012 12:47 AM IST
probe wiil continue against maran orderd supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन के खिलाफ याचिका दायर करने के बाद द्रमुक नेता को क्लीन चिट देने वाले एनजीओ के सचिव के खिलाफ जांच शुरू करने की सीबीआई को छूट दे दी है। सचिव की ओर से सीबीआई निदेशक को लिखे पत्र पर सर्वोच्च अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे जांच में दखल करार दिया। शीर्ष अदालत ने सीबीआई से कहा कि वह कानून के अनुसार जांच जारी रखे।
जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस केएस राधाकृष्णन की पीठ ने एनजीओ टेलीकॉम वॉचडॉग के सचिव अनिल कुमार शर्मा के खिलाफ जांच के सीबीआई के आग्रह को स्वीकार कर लिया। एनजीओ तथा एक अन्य स्वयंसेवी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने एयरसेल की ओर से अपने शेयर मलयेशिया की फर्म मैक्सिस को बेचने में तत्कालीन संचार मंत्री दयानिधि मारन की कथित भूमिका की सीबीआई जांच के लिए पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

लेकिन अनिल शर्मा ने इस साल फरवरी में सीबीआई निदेशक को लिखे पत्र में मारन को क्लीन चिट दे दी। उसने अपनी पत्रिका टेलीकॉम लाइव में एक लेख प्रकाशित करके मारन को बेगुनाह कहा और पूर्व संचार मंत्री के खिलाफ शिकायत दायर करने वाले मैक्सिस कंपनी के मालिक सी शिवशंकर पर सारा दोष मढ़ दिया था।

पीठ ने साफ किया कि सीबीआई को जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की जरूरत नहीं है। यदि एजेंसी को लगता है कि एनजीओ की भूमिका की जांच जरूरी है तो वह आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई निदेशक को लिखा गया पत्र जांच में आड़े नहीं आना चाहिए। सीबीआई को अभी तक जांच समाप्त कर लेनी चाहिए थी।

पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल हरेन रावल से कहा कि इस तरह के पत्र कूड़ेदान में डालने लायक हैं। अदालत ने वकील प्रशांत भूषण से भी जानना चाहा कि आखिर इस तरह का पत्र क्यों लिखा गया। यह अदालत की मर्यादाओं के अनुकूल नहीं है। जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तो सीबीआई निदेशक को पत्र लिखना किसी भी सूरत में जायज नहीं कहा जा सकता। इस पर भूषण ने इस पत्र से अपने आप को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि याची ने पत्र लिखने के लिए उनकी सलाह नहीं ली।

गौरतलब है कि मारन पर आरोप है कि उन्होंने संचार मंत्री रहते हुए मलयेशिया की दूरसंचार कंपनी मैक्सिस को नियमों के खिलाफ लाइसेंस दिया और बदले में अपने निजी कारोबार को लाभ पहुंचाया। मारन 2004 से 2007 तक संचार मंत्री रहे। उसके बाद ए राजा ने उनका स्थान लिया था। घोटाले में नाम उछलने पर मारन ने पिछले साल जुलाई में कपड़ा मंत्री के पद इस्तीफा दे दिया था।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

रमजान 2017: सेहरी में खाएंगे ये 5 चीजें तो दिनभर नहीं लगेगी भूख

  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

एक ही फिल्‍म कर गुमनाम हुई ये 'गांव की छोरी', अब विदेश में खड़ा किया अरबों का साम्राज्य

  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

रमजान 2017ः पवित्र माह का पहला रोजा आज, जानें इससे जुड़े सख्त नियम

  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

#Menstrual hygiene day: पीरियड्स में रखें इन बातों का ख्याल, वरना हो सकती हैं ये दिक्कतें

  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

कई फिल्मों में काम कर चुकीं इस पॉपुलर एक्ट्रेस के साथ बेटे ने किया कुछ ऐसा, फूट-फूट कर रोईं

  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

Most Read

अनुपम खेर ने पूछा- क्या राहुल गांधी राष्ट्रगान गा सकते हैं?

Can Rahul Gandhi sing national anthem, asks Anupam Kher
  • सोमवार, 5 दिसंबर 2016
  • +

'विराट' के बाद नौसेना से एल्बाट्रॉस विमान की भी विदाई

India Navy Adieu Farewells To Albatross Patrol Aircraft
  • बुधवार, 8 मार्च 2017
  • +

आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकते : हाईकोर्ट

allahabad highcourt says over criminal election contestent
  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top