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‘खाकी’ और ‘खादी’ दोनों के दामन पर हैं दुष्कर्म के दाग

मनीष श्रीवास्तव/लखनऊ

Updated Tue, 25 Dec 2012 10:36 AM IST
politician and policemen are also involved in rape
केस एक- अंबेडकरनगर के अकबरपुर की बलात्कार पीड़ित युवती को न्याय दिलाने के बहाने एसएसआई मान सिंह ने फैजाबाद के एक होटल में ले जाकर बलात्कार किया। फैजाबाद पुलिस ने एसएसआई को जेल भेज दिया। मामले की जांच हुई तो पता चला कि अकबरपुर कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी एके उपाध्याय ने भी युवती के साथ बलात्कार किया था। कोतवाल के खिलाफ अभी जांच चल रही है।
केस दो- लखनऊ के माल थाने में फर्जी शिकायत को लेकर एक दारोगा ने महिला को अपने कमरे में बुलाकर दुराचार की कोशिश की। महिला के हंगामा करने पर पोल खुल गई और दारोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मौके पर दारोगा को नहीं पकड़ा और उसे भाग निकलने का मौका दे दिया। बाद में दारोगा को निलंबित कर जेल भेजा गया।

केस तीन- बांदा में पूर्व बसपा विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के यहां घरेलू नौकरानी शीलू के साथ सामूहिक दुराचार किया गया। बसपा सरकार में पूर्व विधायक की मदद लगे जिले के पुलिस अधिकारियों ने पहले पूरे मामले को गलत ठहरा दिया और चोरी के आरोप में जेल भेजी गई शीलू को धमकाया। हालांकि मामले के तूल पकड़ने पर कार्रवाई हुई और अब पूर्व विधायक जेल में हैं।

केस चार- पूर्व राज्यमंत्री और विधायक आनंद सेन पर शशि नामक युवती का यौन शोषण करने और बाद में उसे लापता करने का आरोप लगा। शशि का कोई पता नहीं चलने पर उसकी हत्या करा देने का आरोप भी मंत्री पर लगा। इससे पहले मंत्री ने इस मामले को अपने ड्राइवर से जुड़ा बताकर रफा-दफा करने की कोशिश की लेकिन शशि के घरवालों के पीछे न हटने की वजह से वह फंस गए। नतीजतन पूर्व सपा सरकार में मंत्री रहे आनंद सेन को इस्तीफा देना पड़ा। इनके खिलाफ मुकदमा चला और अब वह जेल में हैं।

ये चार उदाहरण बताते हैं कि यूपी में ‘खादी’ और ‘खाकी’ दोनों के दामन पर दुष्कर्म के आरोपों के काले धब्बे हैं। बीते कुछ सालों में सत्ता और पावर के दंभ से दोनों वर्गों में किसी भी हद तक गिर जाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। ये उदाहरण ऐसे हैं जिनमें स्वयं पीड़िता या उसके घरवालों ने साहस जुटाया और सामने आ खड़े हुए। वहीं कुछ घटनाएं ऐसी भी हुईं, जो अंधेरे में गुम हो गईं। इन मामलों में ‘खाकी’ और ‘खादी’ दोनों ने एक-दूसरे का साथ दिया और अलग-अलग मामलों में एक-दूसरे को बचाने की कोशिश भी की।

हर बार हुई ‘खाकी’ को बचाने की कोशिश
कानपुर में ऐसी ही एक घटना हुई जिसने खाकी को सरेआम शर्मसार किया। यहां एक सैन्य अधिकारी की बेटी का महीनों तक यौन शोषण किया जाता रहा। शिकायत मिलने के बाद पहले पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया और जब मजबूरन मुकदमा दर्ज करना पड़ा तो जांच में ढिलाई बरती रही क्योंकि आरोपी कोई और नहीं बल्कि कानपुर में ही कैंट सर्किल में तैनात सीओ अमरजीत शाही था। अमरजीत ने पहले युवती से नजदीकी बढ़ाई और फिर जबरन संबंध बनाए। इसके बाद वह लगातार युवती को धमकाता रहा कि अगर उसने मुंह खोला तो उसके परिवार के सदस्यों के फर्जी केस में फंसा देगा। इस तरह वह कई महीने तक युवती का यौन शोषण करता रहा। परेशान होकर युवती ने ऊपर तक शिकायत की। इसके बाद ही सीओ के खिलाफ कार्रवाई हो सकी। अब शाही जेल में है।

‘खाकी’ के दामन पर सबसे शर्मनाक दाग लखीमपुर खीरी के निघासन थाने में लगा। यहां एक मंदबुद्धि किशोरी को बहला फुसला कर थाने में ही उसके साथ दुराचार करने की कोशिश की गई। उसने विरोध किया तो पुलिसकर्मियों ने उसकी गला दबा कर हत्या कर दी। इसके बाद थाने में ही एक पेड़ पर फंदे से लटका कर यह साबित करने की कोशिश की कि किशोरी ने आत्महत्या कर ली। पहले तो जिले के अधिकारियों ने मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया पर जब मामले ने तूल पकड़ा तब जाकर कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और कुछ लोगों को जेल भी जाना पड़ा।

सीतापुर के पिसावां थाने का मामला भी अभी लोगों के जेहन में ताजा है। उम्रदराज एक दारोगा ने थाने के ही चौकीदार के नाबालिग बेटे के साथ दुष्कर्म कर दिया। किशोर की स्थिति देख लोगों को इसकी जानकारी हुई और दारोगा के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसी तरह कुशीनगर में भी एक दारोगा और पुलिस चौकीदार को दुराचार के मामले में पिछले दिनों जेल जाना पड़ा था। इस मामले को पहले तो जिले के अधिकारियों ने दबाने की कोशिश की पर बात बढ़ जाने पर उन्हें कार्रवाई करनी पड़नी पड़ी।

मंत्रियों को देना पड़ा इस्तीफा और हुई जेल
आशनाई और फिर यौन शोषण के मामले में यूपी के राजनेता सबसे आगे रहे हैं। दो पूर्व मंत्री आनंद सेन शशि मामले में और अमरमणि त्रिपाठी मधुमिता मामले में जेल हैं। शशि और मधुमिता दोनों की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा कुछ और मंत्रियों और राजनेताओं के किस्से राजनीति की कॉकटेल में बुलबुलों की तरह उछलते रहे हैं। वहीं बसपा सरकार में मंत्री रहे अवधपाल सिंह यादव पर भी एक दलित युवती ने नौकरी दिलाने के नाम पर बलात्कार करने का आरोप लगाया है।

एटा के जैथरा थाने के कसूलिया गांव की रहने वाली इस युवती ने अवधपाल के एमएलसी भाई चंद्र प्रताप पर भी बलात्कार का आरोप लगाया है। इस मामले में उन्हें कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। पूर्ववर्ती सपा सरकार में मंत्री रहे मेराजुद्दीन और चौधरी बाबूलाल को कविता चौधरी के यौन शोषण और फिर उसे गायब कर देने के आरोप में मंत्री पद गंवाना पड़ा था। हालांकि बाद में यह मामला ठंडा हो गया। सपा के सुल्तानपुर सदर से विधायक अनूप संडा भी शामरीन खान नामक युवती द्वारा लगाए गए आरोपों से गुजर रहे हैं। शामरीन को विधायक के खिलाफ धरना भी देना पड़ा।

न्यायायिक और चुनावी प्रक्रिया में हो बदलाव
नेताओं और पुलिसवालों में ‘पावर’ के साथ ही ऐसी प्रवृत्ति बढ़ रही है। अगर न्यायायिक और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव हो जाए तो पूरा सिस्टम सुधर जाए। खाकी और खादी भी सुधर जाएगी। अभी लड़कियों केसाथ दुष्कर्म के मामलों में ट्रायल लंबे समय तक चलते रहते हैं। यह ट्रायल सीआरपीसी की धारा 309 के तहत होते हैं, जिसमें वर्ष 2008-09 में संशोधन करके यह तय किया गया था कि बलात्कार के मामलों में अधिकतम तीन महीने के भीतर तफ्तीश पूरी कर चार्जशीट लगा दी जाए।

वहीं दो महीने के भीतर ट्रायल पूरा कर लिया जाए। लेकिन ऐसा होता नहीं है। तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत है। जब तक सजा नहीं होगी, कोई सुधार नहीं होगा। इसको लेकर सरकारों ने कोई कदम नहीं उठाया। संशोधन धरे रह गए। वहीं चुनाव आयोग ने भी बलात्कार के साथ सात साल की सजा से ऊपर वाले गंभीर मामलों में ट्रायल होने पर प्रत्याशी को चुनाव से डिबार करने की सिफारिश की थी, लेकिन यह सिफारिश भी मानी नहीं गई। जब तक नेता चुनाव लड़ने से रोके नहीं जाएंगे, वह सुधरेंगे नहीं।
- केएल गुप्ता, पूर्व डीजीपी

दोषी चाहे कोई हो पुलिस नहीं बख्शेगी
‘कोई भी व्यक्ति जो दुष्कर्म या बलात्कार का आरोपी है, उसकी तफ्तीश तेजी से की जाएगी। वह चाहे कोई भी हो किसी को भी पुलिस बख्शेगी नहीं। ऐसे मामलों में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नाबालिग से दुराचार के मामले में रासुका तक लगाई जा रही है।’
- एसी शर्मा, पुलिस महानिदेशक

यूपी के ‘माननीय’ देश भर में आगे
दुष्कर्म के मामलों में यूपी के माननीय अन्य राज्यों से आगे हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के अनुसार चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में 28 राज्यों, सात केंद्र शासित प्रदेशों के कुल विधायकों की संख्या 4,120 है। इनमें से पांच विधायकों के खिलाफ बलात्कार के मामले चल रहे हैं। यह खुलासा खुद इन विधायकों ने अपने शपथ पत्र में किया है। इन पांच में एक-एक विधायक गुजरात और आंध्र प्रदेश से हैं, जबकि  तीन उत्तर प्रदेश के हैं। अनूप संडा के अलावा राज्य सरकार के स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री मनोज कुमार पारस केखिलाफ बलात्कार के मामले चल रहे हैं। वहीं बसपा के बुलंदशहर से विधायक मो.अलीम के खिलाफ भी बलात्कार का मामला चल रहा है।

यूपी में गूंजे बलात्कार कांड

शुभ्रा लाहिड़ी कांड
बनारसीदास के मुख्यमंत्रित्व काल में लखनऊ में शुभ्रा लाहिड़ी कांड सियासी गलियारों से लेकर गांव की चौपालों तक चर्चा का विषय बन गया था। जनवरी 1980 में लखनऊ के सुजानपुरा आलमबाग निवासी एमए की छात्रा शुभ्रा लाहिड़ी अचानक गायब हो गई थी। करीब बीस दिन बाद उसकी अर्धनग्न लाश मॉल एवेन्यू के पीछे नाले में मिली। इस मामले की सीबीआई ने जांच की और बलात्कार की पुष्टि हुई।

नरायनपुर कांड
बनारसीदास के ही कार्यकाल में देवरियां के नारायनपुर गांव के हाटा थाना क्षेत्र में हुई एक बुजुर्ग महिला की मौत पर धरना दे रहे ग्रामीणों को रात के अंधेरे में बुरी तरह पीटने और महिलाओं के साथ दुराचार व उत्पीड़न करने के पुलिस पर आरोप लगे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी घटनास्थल पर पहुंची थीं। यह मामला इतना तूल पकड़ा कि बनारसी दास सरकार बर्खास्त कर दी गई और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया था।

माया त्यागी कांड
9 जून 1980 को वीपी सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके महज कुछ दिन बाद ही 16 जून को अपने भाई की बेटी की शादी में पति व उनके दो दोस्तों के साथ कार से जा रही माया त्यागी के साथ बलात्कार की नीयत से पुलिस सब इंस्पेक्टर ने उसे सड़क पर निर्वस्त्र कर दिया। पति व उनके मित्रों ने विरोध किया तो उन्हें न सिर्फ पीटा बल्कि डकैत भी घोषित कर दिया। महिला की भी पिटाई की गई। इस घटना पर जमकर हंगामा हुआ तो जांच पीएन राय कमीशन को सौंप दी गई।

सिसवां कांड
श्रीपति मिश्र के मुख्यमंत्रित्वकाल में बस्ती के सिसवां में सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया। यह कांड विधानसभा से लेकर संसद तक गूंजा। इसके बाद पूरा थाना सस्पेंड कर दिया गया था।

कुच्ची देवी कांड
मुलायम सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में 1990 में फतेहपुर जिले के सातो गांव में कुच्ची देवी नामक दलित महिला के साथ गांव के ठाकुरों ने दुराचार का प्रयास किया। प्रयास में असफल होने पर महिला को आग लगा दी। जान बचाने के लिए कुच्ची देवी तालाब में कूद गई इसके बावजूद उसकी मौत हो गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का निर्वाचन क्षेत्र होने के कारण इस घटना से देश व प्रदेश की सियासत कई दिनों तक गरमाई रही ।
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