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फेसबुक कमेंट मामले में पुलिस और सरकार की फजीहत

मुंबई/नई दिल्ली/सुमंत मिश्र

Updated Wed, 21 Nov 2012 12:52 AM IST
police and government trounced in facebook comment case
शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे के निधन पर मुंबई बंद को लेकर फेसबुक पर कमेंट करने के मामले में दो लड़कियों को हिरासत में लेने और फिर जमानत पर रिहा करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। लड़की के चाचा डॉक्टर अब्दुल डाढा की क्लीनिक में तोड़फोड़ करने के आरोप में पुलिस ने मंगलवार को ठाणे जिला के पालघर क्षेत्र के शिवसेना नगर प्रमुख भूषण सांखे के साथ 11 शिवसैनिकों को हिरासत में ले लिया। विभिन्न पार्टियों के साथ ही केंद्रीय मंत्रियों ने पुलिस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक से घटना की रिपोर्ट मांगी है। उधर, महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने सोमवार की रात  कोंकण जोन के आईजी को मामले की जांच कर 48 घंटे में रिपोर्ट देने का आदेश दिया।

पाटिल ने मंगलवार को कहा कि मामले की छानबीन शुरू हो चुकी है और उम्मीद है कि कल तक इसकी रिपोर्ट मिल जाएगी। इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि सरकार रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट मिलते ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी व आरटीआई कार्यकर्ता वाईपी सिंह की पत्नी आभा सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्होंने महिला राज्य आयोग में पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सिर्फ शाहिन डाढा और रिनी श्रीनिवासन का ही अपमान नहीं हुआ है, बल्कि नागरिक अधिकारों का हनन हुआ है।

इस बीच, केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच की जरूरत है। जद-यू प्रमुख शरद यादव ने दोनों लड़कियों की गिरफ्तारी को लगत बताते हुए कहा है कि वे इस मामले में महाराष्ट्र के सीएम से बात करेंगे। लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने दोनों लड़कियों की गिरफ्तारी आईपीसी के दुरुपयोग का उदाहरण है।

वामपंथी पार्टी माकपा ने भी दोषी पुलिस वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस घटना से पता चलता है कि महाराष्ट्र की कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने शिवसेना की असहिष्णु एवं निरंकुश राजनीति के सामने घुटने टेक दिए हैं। उधर, इंडिया अगेंस्ट करप्शान के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने लड़कियों को गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की है।

टिप्पणी जिस पर मचा बवाल
'सम्मान अर्जित किया जाता है, दिया नहीं जाता और जबरदस्ती तो बिल्कुल भी नहीं। मुंबई आज डर के कारण बंद हुई न कि सम्मान के कारण।'

'फेसबुक पर किए गए अपने पोस्ट के लिए मैं माफी मांगती हूं। मैं आगे से कभी भी सोशल मीडिया नेटवर्क का उपयोग नहीं करूंगी। जहां तक बाला साहेब ठाकरे की बात है तो वे एक महान व्यक्ति थे और मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं।'
- शाहिन

'मैंने जो किया उसके लिए मैं माफी मांगती हूं। आगे से मैं फेसबुक पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले दो बार सोचूंगी।'
- रिनी

'फेसबुक कमेंट के मामले में दोनों लड़कियों की गिरफ्तारी से मुझे गहरा दुख हुआ है। आईटी एक्ट का इस्तेमाल किसी को विचार व्यक्त करने से रोकने के लिए नहीं होना चाहिए।'
- कपिल सिब्बल, केंद्रीय दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री

'फेसबुक पर कमेंट के मामले में पुलिस ने जो कार्रवाई की है उसमें कुछ भी गलत नहीं है। बंद का आयोजन शिवसेना की ओर से नहीं किया गया था, बल्कि यह स्वत:स्फूर्त था।'
- संजय राऊत, शिवसेना सांसद

'दोनों लड़कियों के साथ जो कुछ भी हुआ वह गलत है। संविधान ने देश के हर नागरिक को अभिव्यक्ति का अधिकार दिया है। इस अभिव्यक्ति की रक्षा की जिम्मेदारी संविधान के तहत काम करने वालों लोगों की बनती है।'
- महेश भट्ट, फिल्मकार

'पुलिस को मेरे क्लीनिक में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। शाहिन ने तो माफी मांग ली थी। उसके बावजूद पुलिस ने धार्मिक भावना भड़काने का आरोप लगा दिया, जबकि बाला साहेब राजनेता थे, कोई धार्मिक नेता नहीं।'
- डॉक्टर अब्दुल डाढा, शाहिन के चाचा

पुलिस का आचरण संदिग्ध: वाईपी सिंह
पूर्व आईपीएस अधिकारी वाईपी सिंह ने कहा है कि इस पूरे मामले में पुलिस का आचरण संदिग्ध है। पुलिस ने दोनों लड़कियों को लोकल राजनेताओं के दबाव में हिरासत में लिया। साथ ही पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की भी अवमानना की है, जिसके तहत रात में किसी महिला को हिरासत में नहीं लिया जा सकता। पहले रात में 10 बजे शिवसैनिकों के साथ जाकर दोनों लड़कियों को थाने पर लाया गया, फिर उन पर धारा 505 के अनुच्छेद 2 के तहत आपसी झगड़े के साथ ही आईटी एक्ट की धारा 66 लगाई गई। रात में तीन बजे के करीब उन दोनों को घर जाने दिया गया। फिर सुबह 9 बजे थाने बुलाया गया और धारा 505 हटाकर 295ए (धार्मिक भावना के साथ खिलवाड़) के तहत मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में न्यायिक हिरासत की मांग की गई। सिंह के अनुसार कोर्ट की भूमिका भी स्पष्ट नहीं है। पहले दोनों लड़कियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया और फिर आधे घंटे बाद ही उन्हें 15 हजार के मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया गया।
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