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स्कूलों में शोषण हुआ तो मालिकों पर भी कार्रवाई

नई दिल्ली/बृजेश सिंह

Updated Thu, 18 Oct 2012 11:14 PM IST
owners will be resposible for exploitation in schools also
छात्रों से ज्यादा फीस वसूलने का मामला हो या शिक्षकों को पूरा वेतन नहीं देने की शिकायत। अब स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। फीस की आड़ में रिजल्ट रोकने व परीक्षा में न बैठने देने जैसी घटनाओं पर प्रबंधन के साथ ही स्कूल मालिकों तथा उनसे जुड़े ट्रस्ट व सोसायटी के संचालकों को जिम्मेदार मानते हुए कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।
मानव संसाधन मंत्रालय स्कूलों में छात्रों, अभिभावकों के साथ ही शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए अगले सत्र में दि प्रोहिबिजन ऑफ अनफेयर प्रेक्टिसेज इन स्कूल्स बिल संसद में पेश करेगा। इस बिल का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। पहली नवंबर को कैब की मीटिंग में ड्राफ्ट पर स्वीकृति के बाद इसे कैबिनेट को भेजा जाएगा।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा तैयार अनफेयर प्रेक्टिसेज बिल, 2012 के कुल पांच भाग हैं। बिल में स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों को क्या करना जरूरी होगा तथा क्या करना गैर कानूनी होगा। गैरकानूनी बताए गए कामों की शिकायत के लिए संबंधित राज्यों तथा केंद्र द्वारा गठित ट्रिब्यूनल अथवा संस्था में शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी।

बिना रसीद कोई भी फीस या भुगतान लेना, प्रवेश में मनमाना रवैया बरतने, स्पेशल बच्चों अथवा एड्स पीड़ित बच्चे को प्रवेश देने से इंकार करने, कैपिटेशन फीस लेने, शिक्षकों को न्यूनतम वेतन नहीं देने तथा तय वेतन से कम वेतन देने आदि मामलों की शिकायत पर दोषी प्रबंधन तथा स्कूल संचालक को आर्थिक दंड दिए जाने का प्रावधान इस बिल में किया गया है। इस बिल में स्कूलों द्वारा प्रवेश फार्म अथवा प्रॉस्पेक्टस की बिक्री को भी गैरकानूनी बनाया गया है।

सरकारों द्वारा गठित ट्रिब्यूनल सुनवाई के बाद गंभीर मामलों में अथवा फैसले का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ न्यायालय में भी मुकदमा दायर कर सकता है। कोर्ट द्वारा दोषी व्यक्ति को आर्थिक दंड के साथ ही न्यूनतम 30 दिन से लेकर अधिकतम तीन साल तक की सजा दी जा सकती है।

बिल में यह व्यवस्था दी गई गई कि विभिन्न गलतियों के लिए लगाए जाने वाले आर्थिक दंड की धनराशि संबंधित सरकारों द्वारा तय किया जाएगा। लेकिन ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन नहीं करने पर मामला कोर्ट में जाने पर कितना आर्थिक दंड लगाया जा सकता है इस बारे में अभी फैसला नहीं हुआ है। संभवत: केब कमेटी की बैठक में चर्चा के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा।
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