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एफडीआई के मुद्दे पर विपक्ष की हुंकार

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Thu, 15 Nov 2012 12:30 AM IST
opposition ready to attack on issue of fdi
संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने रिटेल में एफडीआई के फैसले पर सरकार को घेरने के लिए हुंकार भर दी है। भाजपा और माकपा ने एक सुर में कहा है कि संसद में एफडीआई के फैसले का पुरजोर विरोध किया जाएगा। इसी मुद्दे पर नाता तोड़ चुकी तृणमूल कांग्रेस तो सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान भी कर चुकी है, जबकि सरकार में शामिल डीएमके ने भी सियासत में आखिरी समय के सस्पेंस के रोमांच का हवाला देते हुए अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
इससे यूपीए सरकार के लिए सियासी मुश्किलें बढ़ गई हैं। खासतौर पर लोकसभा में 18 सांसदों वाली डीएमके की चुप्पी से संशय बढ़ गया है। दिल्ली में सरकार के खिलाफ भगवा और लाल बिग्रेड के ताल ठोकने से पहले ही चेन्नई में डीएमके प्रमुख करुणानिधि ने दो टूक कहा कि संसद में इस मामले में विधेयक पेश होने पर ही उनकी पार्टी अपना रुख साफ करेगी।

करुणानिधि का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सोमवार को ही केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम उनसे मिले थे। तृणमूल कांग्रेस के साथ छोड़कर जाने और अब डीएमके की खामोशी से सरकार को अपने पक्ष में संख्याबल बनाए रखने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

संसद का शीतकालीन सत्र 22 नवंबर से शुरू हो रहा है। माकपा ने तो वोटिंग के नियमों के तहत एफडीआई रिटेल पर बहस का नोटिस देने की घोषणा कर सरकार के खेमे में हलचल तो मचा ही दी है। कोल आवंटन मामले में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग पर मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ा चुकी भाजपा अब शीतकालीन सत्र में सक्रिय तौर पर भाग लेगी।

राज्यसभा में विपक्ष के उप नेता व पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एफडीआई पर सरकार के फैसले के विरोध को असरदार बनाने के लिए एनडीए अपने सहयोगी दलों के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के साथ भी विचार-विमर्श करेगा और संसद में तालमेल बनाएगा।

उन्होंने कहा कि सत्र शुरू होने से एक दिन पहले एनडीए इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तय करेगा। एफडीआई का विरोध करने के लिए एनडीए व लेफ्ट समेत लगभग पूरा विपक्ष तथा सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सपा भी एक दिन का देशव्यापी बंद कर चुके हैं।

क्या हैं प्रस्ताव के मायने
सितंबर में लिए गए रिटेल में एफडीआई के फैसले पर सरकार को संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह एक विधायी फैसला है। लेकिन यदि इसके खिलाफ विपक्ष प्रस्ताव लाता है और वह पास हो जाता है तो यह यूपीए सरकार के लिए नैतिक हार होगी।

:- डीएमके के 18 समेत सरकार के पास 265 सांसदों का समर्थन
:- बाहर से सपा के 22 और बसपा के 21 सांसद भी दे रहे साथ

'मैंने सौ से ज्यादा फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी है। फिल्म तभी सफल होती है, जब उसमें सस्पेंस हो।'
- करुणानिधि, द्रमुक प्रमुख (एफडीआई मुद्दे पर पार्टी के रुख के सवाल पर)
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