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ममता के अविश्वास प्रस्ताव पर बंटा विपक्ष

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Tue, 20 Nov 2012 12:17 AM IST
opposition divided against no confidence motion of mamata
यूपीए सरकार के खिलाफ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विपक्ष बंट गया है। माकपा महासचिव प्रकाश करात ने दो टूक कह दिया है कि लेफ्ट पार्टियां इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगी। भाजपा भी सरकार के संख्या बल को देखते हुए दुविधा में है।
माकपा की तरह भाजपा का भी मानना है कि संसद में इस प्रस्ताव के गिरने पर यह माना जाएगा कि रिटेल में एफडीआई समेत सरकार के सभी विवादित फैसलों पर मुहर लग गई है। विपक्ष के बंटने से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की ममता की मुहिम फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही है।

भाजपा भी हारने वाले प्रस्ताव पर दांव लगाने को लेकर असमंजस में है। मंगलवार को भाजपा और एनडीए की बैठकें  हो रही हैं। माना जा रहा है कि भाजपा इसी शर्त पर ममता का साथ दे सकती है कि तृणमूल कांग्रेस का एनडीए में शामिल होना सुनिश्चित हो जाए।

पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि भाजपा रिटेल में एफडीआई के सख्त खिलाफ है, लेकिन संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर भूमिका पार्टी संसदीय दल के पदाधिकारियों की बैठक और एनडीए की बैठक में तय होगी। सूत्रों के अनुसार भाजपा शीतकालीन सत्र के बजाय बजट सत्र में यूपीए सरकार का सियासी संकट बढ़ाने के लिए ज्यादा इच्छुक है। भाजपा यह भी जानती है कि जब तक सपा और बसपा सरकार के पाले में हैं, उसे ज्यादा खतरा नहीं है। लेकिन वह ममता को भी अपने पाले से दूर नहीं जाने देना चाहती है।

दूसरी ओर प्रकाश करात ने कहा कि सरकार के पास पूरे नंबर हैं क्योंकि सपा और बसपा उसका बाहर से समर्थन कर रही हैं। इसलिए अविश्वास प्रस्ताव लाने से एफडीआई समेत तमाम मुद्दे पीछे पड़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव गिरने पर सरकार यह दावा करेगी कि उसे जनादेश प्राप्त है। साथ ही वह रिटेल में एफडीआई, भ्रष्टाचार, महंगाई से लेकर विनिवेश सरीखे अपने अन्य फैसलों को भी जायज ठहराएगी।

करात ने कहा कि इसके विपरीत एफडीआई पर नियम 184 के तहत लोकसभा में प्रस्ताव आता है तो सपा और बसपा जैसी तमाम पार्टियां सरकार के फैसले से असहमति जाहिर कर सकती हैं और प्रस्ताव पर सरकार की पराजय के साथ ही उसकी नैतिक शिकस्त होगी। इसीलिए माकपा अविश्वास प्रस्ताव के बजाय एफडीआई पर वोटिंग के प्रस्ताव के लिए तमाम दलों को साथ लाने की कोशिश करेगी।
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