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खुशखबरी, कार्बेट रिजर्व में बढ़ गई बाघों की संख्या

प्रेम प्रताप सिंह/देहरादून

Updated Wed, 17 Oct 2012 11:15 AM IST
number of tigers increased in corbett reserve
समूचे बाघ प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध जिम कार्बेट रिजर्व टाइगर पार्क में बाघों की संख्या बढ़ गई है। बीते साल के मुकाबले पार्क में कम से कम बीस बाघों की बढ़ोतरी हुई है। इसकी पुष्टि नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के निर्देश पर की गई बाघ गणना में हुई है। यह स्थिति तब है जब विभिन्न वजहों से कार्बेट में बीते साल लगभग 32 बाघ दम तोड़ चुके हैं।
बाघों की गणना देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान ने कैमरा ट्रैपिंग (फोटो) के आधार पर की, जिसे पशु गणना की सर्वाधिक प्रामाणिक विधि माना जाता है। भारतीय वन्यजीव संस्थान ने बाघ गणना की रिपोर्ट पिछले हफ्ते ही कार्बेट प्रशासन को भेजी गई। रिपोर्ट के मुताबिक पार्क में न्यूनतम 170 बाघ होने का अनुमान है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बाघों की अधिकतम संख्या 198 तक हो सकती है। क्योंकि कैमरा ट्रैपिंग विधि में भी कुछ बाघों के छूट जाने का अंदेशा रहती है। अगर ऐसा हुआ तो बाघों की संख्या में और भी ज्यादा इजाफा होगा।

उधर, भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल कार्बेट में बाघों की संख्या अब नहीं बढ़ सकती। यह पहले ही सबसे अधिक घनत्व वाला टाइगर रिजर्व बन चुका है। इससे ज्यादा बाघों की आबादी बढ़ी तो उन्हें आवास तलाशने के लिए कार्बेट के आसपास के जंगलों में डेरा जमाना होगा।  

कार्बेट में बाघों की संख्या
2011-12                    170
2010                      150 (अनुमान)
2008                      178 (कार्बेट सहित पूरे प्रदेश की संख्या)
2005                      141
2003                      143
2001                      137

फेज-4 गणना की खासियत
फेज-4 गणना की शुरुआत 2011 से की गई है। इसके तहत देश के सभी नेशनल टाइगर रिजर्व को हर साल अपने स्तर पर बाघों की गणना करानी है। इसमें टाइगर रिजर्व किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय संस्था की मदद भी ले सकता है। वैसे देश में हर चार साल पर बाघों की गणना भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से भी की जाती है। इसे प्रामाणिक आंकड़ा माना जाता है।

डब्ल्यूआईआई ने की कार्बेट की गणना
भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून में स्थित है। ऐसे में कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने फेज-4 की गणना के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान की ही मदद ली। इस दौरान 1288 वर्ग किमी में फैले टाइगर रिजर्व में 229 कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों में बाघों के चित्र कैद किए गए। उसी के आधार पर गणना की रिपोर्ट तैयार की गई।

कार्बेट में जिस अनुपात में बाघों की मौत हो रही है, उसी तेजी से शावकों का जन्म हुआ है। अब कार्बेट में बाघों की संख्या बढ़ नहीं सकती। ऐसे में बाघ आसपास के वन क्षेत्रों की ओर अपना वास स्थल विकसित करेंगे।
- डॉ. वाईके झाला, वैज्ञानिक, भारतीय वन्यजीव संस्थान
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