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युद्ध में नहीं भेजा जा सकता महिलाओं को: SC

पीयूष पांडेय/नई दिल्ली

Updated Fri, 14 Sep 2012 12:51 PM IST
women can not be sent to war sc
भारतीय थल सेना ने महिलाओं को स्थायी कमीशन देकर जंग के मैदान में भेजने की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। सेना ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि महिला अधिकारियों की दुश्मन से शारीरिक निकटता उनके लिए बड़ा खतरा है। जंग में बंदी बनाए जाने का संकट है। जबकि सहायता सेना में महिलाओं को शामिल करने से युद्ध क्षमता प्रभावित होगी क्योंकि महिलाओं की शारीरिक क्षमता पुरुषों के मुकाबले कम होती है। ऐसे में दुश्मन भारी पड़ सकता है।
सर्वोच्च अदालत में रक्षा मंत्रालय के सेना हेडक्वार्टर की ओर से दायर हलफनामे में महिलाओं को शिक्षा और न्यायिक विभाग के सिवा किसी भी महकमे में स्थायी कमीशन देने से साफ इंकार किया। रिकॉर्ड के हवाले से कहा गया है कि आम तौर पर समझा जाता है,मोर्चे की सहायता के लिए भेजी जाने वाली यूनिटें जंग के मैदान में नहीं जाती। लेकिन सहायता टुकड़ियों को भी खामियाजा भुगतना पड़ता है।

आंकड़ों का हवाला देते हुए सेना ने कहा कि कई सहायक अफसर युद्ध के दौरान शहीद हुए हैं। 1999 से अब तक युद्ध क्षेत्र के अलावा आंतरिक सुरक्षा में आर्मी कोर के 44, इलेक्ट्रॉनिक मकैनिकल इंजीनियर्स के 26 और आर्मी आयुध कोर के चार अधिकारी शहीद हुए हैं। महिलाओं को इन विभागों में नियुक्त किया जाता है। लेकिन उन्हें स्थायी कमीशन नहीं दिया जाता। ताकि वह जंग के मैदान से दूर रहें।

सेना हेडक्वार्टर ने यह हलफनामा सर्वोच्च अदालत की उस टिप्पणी पर दिया है जिसमें कहा गया था कि कानून और शिक्षा विभाग के अलावा सेना के अन्य महकमों में भी स्थायी कमीशन दिया जा सकता है। सेना ने कहा है कि इस बाबत अदालत के निर्देशों को बहुत बारीकी से परखा गया है। सेना ने कई व्यावहारिक दिक्कतों का जिक्र किया है। सेना ने साफ किया कि हमें लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि सेना को उसकी खास जरूरतों के हिसाब से देखना होगा।

महिला अफसर से मतभेद पड़ सकता है भारी
सेना ने सर्वोच्च अदालत से कहा कि अधिकांश जवान देश के ग्रामीण इलाकों से आते हैं, जिन्हें महिला अधिकारी को अपना मुखिया मानने में वक्त लगेगा। जंग के मैदान में महिला अधिकारी और जवानों के बीच किसी भी प्रकार का मतभेद घातक साबित हो सकता है। फिर महिलाओं पर मुख्य रूप से परिवारिक जिम्मेदारियां होती हैं, ऐसे में महिला अधिकारी अपने पति के साथ तैनाती चाहती हैं। ऐसे तमाम आवेदन अधिकारियों को आए-दिन मिलते हैं।
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