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कालेजों में रैगिंग रोकेगा 'वन टू वन' टेस्ट

ग्रेटर नोएडा/अमित कुमार बाजपेयी

Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
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रैगिंग रोकने के लिए विभिन्न संस्थान नया प्रयोग कर रहे हैं। माना जा रहा है कि नए सत्र में छात्रों की ‘वन टू वन काउंसलिंग’ से जहां रैगिंग पर रोक लगेगी, वहीं ‘पर्सनैलिटी एनालिसिस टेस्ट (पैट)’ से हर छात्र के बारे में मनोवैज्ञानिक और व्यक्तित्व संबंधी पूरी रिपोर्ट संस्थान प्रबंधन के पास रहेगी। इससे छात्रों को उसके मानसिक स्तर के अनुरूप पढ़ाई और प्रशिक्षण देने के साथ ही मनोविकारों से ग्रस्त छात्रों पर विशेष नजर रखी जा सकेगी।
नॉलेज पार्क-तीन स्थित शारदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पीके गुप्ता ने बताया कि नए सत्र से हर छात्र की वन टू वन काउंसलिंग और पैट होगा। मनोविशेषज्ञ, शिक्षकों और कुछ चुनिंदा वरिष्ठ छात्रों की टीम के सामने एक काउंसलर हरेक छात्र से कई सवाल-जवाब करेगा, जिसके आधार पर छात्र की मार्किंग की जाएगी। प्राप्तांकों के आधार पर छात्रों की मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट कैटेगरी तैयार की जाएगी।

केसीसी इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. शरद चंद्र अग्रवाल के मुताबिक पैट और वन टू वन काउंसलिंग से छात्रों का व्यक्तित्व, कौशल और ज्ञान आधारित विश्लेषण और वर्गीकरण हो जाएगा। इसके आधार पर संबंधित छात्रों को जरूरी ट्रीटमेंट दिया जाएगा। एनआईईटी इंस्टीट्यूट के निदेशक (प्रोजेक्ट्स एंड प्लॉनिंग) प्रो. प्रवीण पचौरी ने बताया कि नए सत्र से पहली बार संस्थान इसका प्रयोग कर रहे हैं। इसके परिणाम छात्रों में आश्चर्यजनक परिवर्तन करेंगे।

नॉलेज पार्क स्थित हरलाल, जीएनआईटी, मंगलमय, एक्यूरेट, स्काईलाइन इंस्टीट्यूट समेत कई अन्य संस्थान भी इस तरह की विधि प्रयोग की जाएंगी।

ये मिलेगा फायदा...
- होनहारों को मिलेगा जरूरत पर प्रशिक्षण
- सामान्य छात्रों के लिए चलेंगे विकास कार्यक्रम
- कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान और कौशल विकास कार्यक्रम
- हर छात्र की रिपोर्ट, स्कोर कार्ड के साथ संपर्क, पता और अभिभावकों का संपर्क

रैगिंग रोकने में ऐसे मिलेगी मदद...
- मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट छात्रों की सोच बताएगी
- विध्वंसात्मक, हीन भावना, तनाव, हताशा, आपराधिक, आवेगी, विद्वेषी, क्रोधी, फोबिया आदि मनोविकारों से ग्रस्त छात्रों की अलग लिस्ट तैयार होगी।
- ऐसे छात्रों के लिए व्यक्तित्व विकास कार्यक्रमों में शामिल होना किया जाएगा अनिवार्य
- इन छात्रों पर चुनिंदा शिक्षकों-छात्रों की रहेगी गोपनीय नजर।
- विशेषज्ञों के मुताबिक स्कोर कार्ड से रैगिंग करने वालों की 90 फीसदी पहचान संभव
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