आपका शहर Close

वीरभद्र के राजनीतिक भविष्य पर सवाल

शिमला/ब्यूरो

Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
questions-on-Virbhadra-Singh-political-future
सीडी मामले में आरोप तय होने के बाद वीरभद्र सिंह का मंत्री पद भी चला गया है। सवाल खड़े हो रहे हैं कि 50 साल से कांग्रेस की नाव को हिमाचल में थाम रहे वीरभद्र सिंह का राजनीतिक भविष्य अब क्या होगा? जाहिर है मंत्री पद चले जाने के बाद समर्थकों को झटका लगा है।
प्रतिद्वंदियों में भी हलचल पैदा हो गई है। कांग्रेस के भीतर सवाल उठने लगा है कि वीरभद्र सिंह नहीं तो फिर कौन? क्या उनके बाद आनंद सिंह, कौल सिंह या फिर विद्या स्टोक्स की बारी है। जीएस बाली भी लाइन में हैं।

जाहिर है अब सवाल उठेगा कि ऐसा कौन नेता है, जो मुख्यमंत्री बनने की काबिलियत रखता है, जिसे हाईकमान पार्टी की प्रत्यक्ष या परोक्ष कमान दे सकता है? इस पहेली को वीरभद्र के सीडी केस में उलझाव ने अबूझ बना डाला है। इस हालात में पार्टी हाईकमान के समक्ष असमंजस की स्थिति खड़ी है। क्या केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने पर हिमाचल में दमखम से प्रचार में उतरने की तैयारी कर चुके वीरभद्र ही अब भी कांग्रेस की कश्ती के खेवनहार होंगे?

भले ही हाईकमान की तरफ से विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी नेतृत्व की घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन 25 जून को आरोप तय होने से पूर्व तक गेंद वीरभद्र सिंह के पाले में आती दिख रही थी।

गाहे-बगाहे वीरभद्र की धूर-विरोधी रहती आईं विद्या स्टोक्स रैलियों और जनसभाओं में वीरभद्र के कसीदे पढ़ती नजर आ रही थी, तो प्रदेशाध्यक्ष की गरिमा ढाल से वीरभद्र का आमना-सामना करने वाले कौल सिंह ठाकुर के स्वर भी कुछ नरम पड़ रहे थे। पूर्व मंत्री जीएस बाली में भी नरमी नजर आने लगी थी। परिवर्तन रैलियों में भी वीरभद्र सिंह को जिस तरह का प्रोटोकाल मिल रहा था, उससे भी यह प्रतीत हो रहा था कि सारी बागडोर उनके हाथ में आने वाली है, पर अब वीरभद्र सिंह की राह आसान नहीं दिख रही है।

यूपीए-2 सरकार मुफीद नहीं रही वीरभद्र को
यूपीए-2 सरकार केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह के लिए मुफीद नहीं रही। कभी पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी के पसंदीदा रहे वीरभद्र सिंह कई बार इग्नोर किए गए। 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में वीरभद्र मंडी विधानसभा क्षेत्र से लगभग 13 हजार मतों से सांसद चुने गए थे। 31 मई 2009 को उन्हें केंद्रीय इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।

इसके बाद यह महत्वपूर्ण विभाग भी उनसे वापस ले लिया गया। 19 जनवरी 2011 को उन्हें केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय का कार्यभार मिला। केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद रोहडू़ विधानसभा के उपचुनाव में उनकी पत्नी को हाईकमान ने टिकट ही नहीं दिया, जबकि यह सीट उनके लोक सभा चुनाव लड़ने की वजह से ही खाली हुई थी।

कांग्रेस को परंपरागत सीट हारनी भी पड़ी थी। इसके बाद हिमाचल में हुए युवा कांग्रेस के चुनाव में इनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह को अध्यक्ष चुना गया, मगर इन्हें भी फेम की आपत्ति के बाद यह पद गंवाना पड़ा। विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए मुख्यमंत्री घोषित करने की उनकी मांग को भी हाईकमान इग्नोर कर रहा था।
Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

एक ऐसा परिवार, 100 खतरनाक जानवर करते हैं इसकी रखवाली

  • सोमवार, 23 अक्टूबर 2017
  • +

बाल झड़ने की वजह से लड़कियां पास न आएं तो करें मेथी का यूं इस्तेमाल

  • सोमवार, 23 अक्टूबर 2017
  • +

सलमान खान के लिए असली 'कटप्पा' हैं शेरा, एक इशारे पर कार के आगे 8 km तक दौड़ गए थे

  • सोमवार, 23 अक्टूबर 2017
  • +

भूलकर भी न करें छठ पूजा में ये 6 गलतियां, पड़ सकती है भारी

  • सोमवार, 23 अक्टूबर 2017
  • +

बदलते मौसम में डाइट में शामिल करेंगे ये खास चीज तो फौलाद बन जाएंगी हड्डियां

  • सोमवार, 23 अक्टूबर 2017
  • +

Most Read

पुरुषों के आत्महत्या करने की खबर कभी नहीं सुनी : मेनका 

Never heard of men committing suicide, Says Minister Maneka Gandhi
  • शुक्रवार, 30 जून 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!