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होली पर आखिरी बार गांव आई थी माही

अलीगढ़/ब्यूरो

Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
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गुड़गांव के मानेसर में बोरवेल में समाई माही की जिंदगी के लिए पूरा गांव प्रार्थना में जुटा हुआ था। हर पल की खबर लोग वहां से ले रहे थे। मगर दुर्भाग्य, माही को बचाया न जा सका। होली पर आखिरी बार परिवार के साथ गांव आई माही का शव रविवार देर शाम गांव पहुंचा। हालांकि मौत की खबर पहले ही पहुंच गई थी, मगर शव पहुंचते ही कोहराम मच गया और परिवार ही नहीं, पूरा गांव इस हादसे के प्रति गुस्से में था। लोगों का कहना था कि हरियाणा सरकार ही इस हादसे के लिए जिम्मेदार है।
जवां क्षेत्र के गभाना से सटे गांव सौंगरा निवासी नीरज तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। सबसे बड़े भाई महेंद्र की मौत हो चुकी है, जबकि राकेश दिल्ली में ही ठेकेदारी करता है। नीरज अपनी पत्नी सोनिया और दो बेटियों संग मानेसर में रहते हैं। गांव में उनके दिवंगत भाई महेंद्र के बच्चे और राकेश के बच्चे रहते हैं। परिवार में खेतीबाड़ी न होने और आर्थिक पक्ष से कमजोर होने के कारण नौकरी ही उनकी रोजी-रोटी का जरिया है।

नीरज परिवार सहित मानेसर में बेहद खुश थे। माही के जन्मदिन पर परिवार में खुशियां थीं, तभी यह हादसा हो गया और खबर गांव तक आ गई। कई लोग यहां से दौड़े चले गए, लेकिन माही को बचाया न जा सका। देर शाम माही का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो भीड़ वहां जमा हो गई। परिवार में कोहराम मच गया। औपचारिकताओं के बाद शव को दफना दिया गया।

प्रशासन के झूठ पर हो कार्रवाई
अपनी बेटी की मौत पर नीरज बेहद दुखी तो है ही, लेकिन अपने ऊपर टूटे पहाड़ के लिए हरियाणा सरकार, बोरवेल मालिक से लेकर हरियाणा पुलिस व प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। एक तरफ वह कहते हैं कि जब सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है तो वहां बोरवेल बंद क्यों नहीं कराए जा रहे। दूसरा उनका कहना है कि घटना रात 11.10 पर हुई। मैंने पुलिस को 11.15 पर फोन कर दिया। इसके बाद 12.45 बजे पुलिस वहां पहुंची और उल्टा कोई मदद करने के नाम पर मुझे धमकाने लगी। वह तो मीडिया के लोग वहां पहुंच गए, अन्यथा कोई मदद नहीं दी जा रही थी।

अब जब माही की लाश निकाल ली गई तो वहां के प्रशासनिक अधिकारी और खुद डीसी बयान दे रहे थे कि माही की मौत तो बोरवेल में गिरने के दो घंटे बाद ही हो गई थी। अगर ऐसा था तो फिर हमें अब तक दिलासा क्यों दिया जाता रहा और मदद के नाम पर देरी क्यों हुई? उन्होंने लापरवाह अधिकारियों और बोरवेल स्वामी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

पथरा सी गईं सोनिया की आंखें
लगातार बेटी के सकुशल निकलने के इंतजार के बाद बेटी की लाश मिलने पर सोनिया की आंखें पथरा गई थीं। बेशक गांव में वह अपनी बेटी की लाश लेकर पहुंची और लाश पहुंचते ही परिवार की अन्य महिलाओं का बुरा हाल था, लेकिन सोनिया एकटक बेटी की लाश को बदहवास स्थिति में देखे जा रही थी।

-यह हादसा कहीं न कहीं हरियाणा सरकार की अनदेखी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन न होने के कारण हुआ है। इसलिए इस परिवार को मुआवजा भी मिलना चाहिए।
-देवीशरण शर्मा ग्रामीण

-सरकार के प्रयास काफी कम रहे हैं। वह तो सेना के जवानों ने माही को निकाल लिया। अगर सरकार ही प्रयास करती रहती तो शायद बच्ची का शव भी न मिलता।
-शिवकुमार शर्मा ग्रामीण
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