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4 घंटे संघर्ष, 86 घंटे की कोशिश, लेकिन हार गई जिंदगी

गुड़गांव/मयंक तिवारी

Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
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नहीं बचाई जा सकी माही। कासन की ढाणी के बोरवेल में फंसने के चार घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई थी। शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का कहना है कि माही की मौत करीब 82 घंटे पहले दम घुटने से हुई थी। अब कहा जा सकता है कि माही को समय रहते ऑक्सीजन मिल जाती तो शायद आज कासन में जश्न का माहौल होता।
गौरतलब है कि चार साल की माही बुधवार रात 11 बजे घर के बाहर बोरवेल के 68 फीट गहरे गड्ढे में गिर गई थी। बचाव दल को माही को बाहर निकालने में 86 घंटे का वक्त लगा। बुधवार की रात जब कैमरे पर माही की गतिविधियां दिखनी बंद हुईं तब यह अंदाजा लगाया गया जा रहा था कि वह बेहोश हो गई है।

रविवार की दोपहर जब दो सैनिक सुरंग में उतरे तो लोगों की उम्मीदें बढ़ गईं और जिस तेजी से वो माही का शव लेकर एंबुलेंस की ओर भागे थे, उससे लोगों को यह उम्मीद बंधी कि शायद बच्ची जिंदा होगी। लेकिन कुछ ही मिनटों बाद अस्पताल से जो खबर आई, उसने सभी को गमगीन कर दिया। ईएसआईसी अस्पताल से लेकर पोस्टमॉर्टम हाउस तक मातम छाया रहा। शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर दीपक माथुर ने बताया कि माही की मौत गड्ढे में गिरने के लगभग चार घंटे बाद ही दम घुटने से हो गई थी।

बच सकती थी माही
माही के पिता नीरज उपाध्याय ने हादसे के 15 मिनट बाद ही पुलिस को फोन पर सूचना दे दी थी। लेकिन पुलिस डेढ़ घंटे बाद बिना किसी इंतजाम के घटनास्थल पर पहुंची। इसके एक घंटे बाद बिना किसी साजो-सामान के दमकल की टीम पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की टीम सुबह करीब तीन बजे पहुंची और तब जाकर गड्ढे में ऑक्सीजन की पाइप डाली गई। माही के पिता नीरज ने प्रशासनिक लापरवाही को अपनी बच्ची की मौत का जिम्मेदार बताया है। मौत की खबर सुनने के बाद उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ऑक्सीजन मिल जाती तो आज उनकी बेटी इस दुनिया में हो सकती थी।

खरोंच के निशान
पोस्टमार्टम में बताया गया कि माही के शरीर पर किसी तरह से चोट के निशान नहीं हैं। हथेलियों पर खरोंचे हैं, जो सरकने के दौरान मिट्टी को पकड़ने से लगे हैं। डॉक्टर दीपक का कहना है कि बच्ची ने खुद को खिसकने से बचाने के लिए काफी कोशिशें की थीं। बेहोशी आने की वजह से उसकी पकड़ कमजोर हुई होगी और वह फिसलकर उन चट्टानों के बीच फंस गई। माही का शव जिन चट्टानों के बीच मिला है, सैनिकों को वहां से आवाज ऊपर पहुंचाने के लिए माइक का इस्तेमाल करना पड़ रहा था जबकि माही के रोने की आवाज ढाई घंटे तक ऊपर सुनाई देते रहने का दावा किया गया था।

गैरइरादन हत्या का मामला दर्ज
पुलिस ने नीरज उपाध्याय के मकान मालिक रोहताश के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। उसकी धरपकड़ के लिए छापेमारी भी शुरू कर दी गई है। उधर, गुड़गांव के उपायुक्त पीसी मीणा ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दे दिया है।

बहादुर थी माही
डॉक्टरों का कहना है कि जिन हालात में 15 मिनट भी जिंदा रहना मुश्किल है, वहां बच्ची चार घंटे तक संघर्ष करती रही। सुंरग में जाने वाले बचाव दल के सदस्य भी हर 15 मिनट बाद सांस लेने के लिए ऊपर आ जाते थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नीचे किन मुश्किल हालातों में माही ने दम तोड़ा होगा।
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