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तपते सूरज से सूखने लगा बांधों में पानी

हरीश लखेड़ा/नई दिल्ली

Updated Sun, 24 Jun 2012 12:00 PM IST
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मौसम के तल्ख मिजाज का असर देशभर की नदियों खासतौर पर हिमालयी नदियों और बांधों पर भी साफ दिखने लगा है। आग उगलते सूरज के कारण नदियों और बांधों का पानी लगातार सूख रहा है। उत्तरी राज्यों के सभी बांधों में पानी अब खतरे के निशान तक पहुंचने के निकट है।
कई बांधों में तो एक हफ्ते के लिए भी पानी नहीं बचा है। जल विद्युत कंपनियों ने भी केंद्र सरकार से कह दिया है कि अब बारिश के बाद ही स्थिति सुधर सकती है। खतरा भांप कर उत्तरी राज्यों की पन बिजली परियोजनाओं को लगभग 3700 मेगावाट बिजली का उत्पादन बंद करना पड़ा है। केंद्रीय विद्युत आयोग की विद्युत मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी राज्यों में स्थित बांधों में जल संकट से सबसे ज्यादा टिहरी बांध जूझ रहा है।

टिहरी और कोटेश्वर बांध 1400 मेगावाट बिजली देते हैं, लेकिन पानी की कमी के चलते इनसे लगभग 700 मेगावाट बिजली पैदा मिल रही है। टिहरी बांध में अब इस्तेमाल करने के लिए मात्र दो मीटर ही पानी बचा है, यानी बांध में न्यूनतम स्तर तक पहुंचने के लिए अब मात्र दो मीटर पानी है। पिछले साल की तुलना में इस साल जल स्तर पहले ही 0.60 मीटर कम है। भाखड़ा में 20 मीटर और पोंग में 12 मीटर पानी ही इस्तेमाल के लिए बचा है।

इन दोनों परियोजनाओं से लगभग 800 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। इन दोनों में पिछले साल की तुलना में 15-15 मीटर पानी कम है। रंजीत सागर में भी अब इस्तेमाल के लिए मात्र 12 मीटर पानी बचा है। उत्तराखंड की रामगंगा की स्थिति अलबत्ता कुछ ठीक है, लेकिन उत्तर प्रदेश के रिहंद बांध में भी मात्र दो मीटर पानी बचा है। मानसून में देर होने पर इन जलाशयों का संकट बढ़ने की आशंका है। इसका खामियाजा बिजली उपभोक्ताओं को उठाना पड़ सकता है।

पन बिजली उत्पादन घटने से थर्मल प्लांटों पर लोड बढ़ गया है, लेकिन कोयला और गैस की कमी के चलते थर्मल प्लांट भी अपनी पूरी क्षमता से बिजली पैदा नहीं कर पा रहे हैं। नतीजतन, बिजली के लिए पहले से हाहाकार कर रहे राज्य बेहाल हैं। पारा 40-45 डिग्री के पार हो जाने के बावजूद उत्तरी राज्यों को 5300 मेगावाट बिजली की कमी से जूझना पड़ रहा है। संकट को देखते हुए केंद्र ने राज्यों को अपने लिए बिजली का खुद ही इंतजाम करने को कह किया है। इधर, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने उत्तरी ग्रिड से ओवर ड्रॉ कर रहे राज्यों को एक बार फिर आगाह किया है।
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