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प्रणब पर लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, जांच की मांग

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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वित्त मंत्री और राष्ट्रपति पद के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के खिलाफ सोमवार को टीम अन्ना ने फिर हमला बोला।
टीम अन्ना ने सरकार से 2008 के चावल निर्यात घोटाले, नेवी वार रूम लीक घोटाले और स्कॉर्पियन पनडुब्बी घोटाले में उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल और डॉक्टर कुमार विश्वास ने कौशांबी स्थित पीसीआरए के कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रणब मुखर्जी पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में दस्तावेज जारी किए।

टीम अन्ना ने भारतीय प्रतिभूमि एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य के एम अब्राहम की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक जून 2011 को लिखे गए पत्र की प्रति भी जारी की, जिसमें मुखर्जी के खिलाफ शिकायत की गई थी।

केजरीवाल ने कहा कि वर्ष 2007 के अंत में भारत में चावल की कमी को देखते हुए बासमती चावल को छोड़कर अन्य चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। चूंकि भारत चावल निर्यात करने वाला एक बहुत बड़ा देश है, ऐसा करने से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चावल के दाम बढ़ गए।

प्रतिबंध लगाने के कुछ महीनों बाद भारत सरकार ने निर्णय लिया कि इस कदम से गरीब देशों की जनता को नुकसान हो रहा है, इसलिए इंसानियत के नाते ऐसे देशों को स्पेशल केस मानकर भारत से सस्ते दामों पर चावल निर्यात करने की इजाजत दी गई।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इंसानियत के नाम पर 10 लाख टन चावल भारत से ऐसे गरीब देशों को निर्यात किया गया, जिसमें भारी घपला हुआ। तत्कालीन विदेश मंत्री और वाणिज्य मंत्री पर आरोप है कि उन्होंने भारत से चावल के निर्यात के मामले में गड़बड़ी की थी। इसके बाद घाना में सरकार बदल गई।

नई सरकार ने जांच बैठाई। जांच के दौरान घाना सरकार ने भारत सरकार को सात पेज की चिटठी लिखी, जिसमें घाना सरकार ने भारत सरकार से निवेदन किया है कि वह इस पूरे मामले में भारतीय वाणिज्य मंत्री और विदेश मंत्री की भूमिका की जांच करें। प्रणव मुखर्जी उस समय विदेश मंत्री थे।

केजरीवाल ने कहा कि भारत के इतिहास में पहले भी ऐसा हुआ है कि किसी और देश की सरकार ने हमारे देश की सरकार के मंत्रियों की जांच करने को कहा हो, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि यह चिट्ठी 2009 में आई थी, लेकिन आज तीन साल हो गए लेकिन इसकी निष्पक्ष जांच नहीं हुई।

इस मामले में आरोप है कि चावल का निर्यात इंसानियत के बहाने कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था। जैसे घाना के मामले में भारत सरकार को सीधे घाना सरकार को चावल निर्यात करना चाहिए था, ऐसा न करके यह निर्यात अमीरा फूड कंपनी के जरिए किया गया। अमीरा फूड ने भारत से बेहद सस्ते दाम में चावल खरीद कर घाना को 670 डॉलर प्रति टन के हिसाब से यह चावल बेचा।

केजरीवाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी चावल की यही कीमत थी, तो फिर इसमें इंसानियत कहां हुई। सारा मुनाफा अमीरा फूड कंपनी के पास चला गया।

उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जानी चाहिए कि अमीरा फूड ने ये मुनाफा घाना और भारत के किन-किन मंत्रियों और किन-किन अधिकारियों के बीच बांटा।

केजरीवाल ने स्कॉर्पियन पनडुब्बी मामले में मुखर्जी की भूमिका के बारे में दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि इस दस्तावेज के अनुसार फ्रांस की थेल्स कंपनी से 18 हजार करोड़ रुपए की स्कार्पियन पनडुब्बी खरीदने के लिए सात अक्तूबर 2005 को मुखर्जी ने करार किया।

आरोप है कि इसमें कुछ दलालों ने भूमिका निभाई, जबकि रक्षा मंत्रालय के नियमों के मुताबिक किसी भी रक्षा सौदों में दलालों पर सख्त प्रतिबंध है। केजरीवाल ने कहा कि इस संबंध में पुख्ता सबूत होने के बाद भी मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई। बार-बार मांग उठाए जाने के बावजूद मुखर्जी ने इन मामलों की जांच करवाने से मना कर दिया।

केजरीवाल ने सवाल किया कि इस मामले में शामिल दलाल क्या कांग्रेस के प्रतिनिधि थे? क्या यह पैसा कांग्रेस को दिया गया? क्या मुखर्जी को इसकी जानकारी थी और वे इस मामले की निष्पक्ष जांच से कतरा क्यों रहे हैं?

केजरीवाल ने नेवी वॉर रूम लीक मामले की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, जिसमें जुलाई 2005 में नेवी वॉर रूम से एक पेन ड्राइव गायब हो गई थी, जो बाद में विंग कमांडर सुर्वे के यहां मिली।

हालांकि सरकार ने काफी दबाव के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, जिसने अदालत में दायर आरोप पत्र में कहा था कि जो जानकारी लीक हुई थी, उससे देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था।

केजरीवाल ने कहा कि इस मामले में मुखर्जी की भूमिका की जांच कराई जानी चाहिए क्योंकि उन्होंने इस लीक में शामिल लोगों को बचाने की कोशिश की थी।
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