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कैग की शंकाएं दूर करने को तैयार सरकार

नई दिल्ली/एजेंसी

Updated Thu, 24 May 2012 12:00 PM IST
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दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की भूमि निजी कंपनी को सौंपने में 1.63 लाख करोड़ रुपये के कथित घोटाले पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) कार्यालय की शंकाओं के समाधान के लिए मंत्रालय तैयार है। मंत्रालय ने कहा है कि कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट मंत्रालय को फरवरी महीने में मिली थी, जिसका जवाब कैग को भेज दिया गया था।
मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार कैग ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला है कि दिल्ली हवाई अड्डे के विकास के लिए सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (डायल) को करीब 4800 एकड़ जमीन कौड़ियों के भाव पट्टे पर दे दी गई। डायल को यह जमीन 100 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से साठ वर्ष के लिए पट्टे पर दी गई, जबकि खुद इस कंपनी ने इस जमीन के व्यावसायिक उपभोग से 1.63 लाख करोड रुपये का मुनाफा होने का अनुमान लगाया था।

मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार कैग ने डायल को भूमि पट्टे पर दिए जाने के बारे में कई सवाल उठाए थे। मंत्रालय के जवाब के बाद कैग और मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक भी हुई जिसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यदि कैग की कुछ अन्य शंकाएं हैं तो फिर बैठक हो सकती है। इस पर कैग ने केवल कुछ अतिरिक्त कागजात मांगे। इसके बाद मंत्रालय को कैग की ओर से कोई सूचना नहीं मिली। मंत्रालय ने कहा कि कैग की अंतिम रिपोर्ट जब उसे प्राप्त होगी तो उसमें उठाए गए मुद्दों का समाधान किया जाएगा।

नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कैग की रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह प्रारूप रिपोर्ट है तथा इसके आधार पर आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। हमें कैग की अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा करनी चाहिए। कैग ने अपनी रिपोर्ट में हवाई अड्डा प्राधिकरण की खिंचाई करते हुए कहा है कि उसने पीपीपी के तहत हमेशा सार्वजनिक क्षेत्र के बजाय निजी कंपनी को तरजीह दी।

उल्लेखनीय है कि हाल में संसद में डायल द्वारा यात्रियों से मनमाना विकास शुल्क वसूलने का मामला भी उठा था। सदस्यों ने आरोप लगाया था कि यात्रियों से विकास शुल्क के नाम पर अवैध धन वसूली की जा रही है।
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