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सियासत के खेल में फिर फेल लोकपाल

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Mon, 21 May 2012 12:00 PM IST
Lokpal-bill-to-be-tabled-in-Rajya-Sabha
भ्रष्टाचार के खिलाफ महाप्रहार माना जा रहा लोकपाल बिल सियासत के खेल में एक बार फिर फेल हो गया। सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में संशोधित लोकपाल बिल पेश तो कर दिया मगर खुद ही उसने इसे आगे विचार के लिए संसद की सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया। इसके साथ ही करीब 42 साल से अटके लोकपाल का इंतजार अब और लंबा हो गया है।
हालांकि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव सबसे पहले सरकार की ओर से नहीं, बल्कि सपा के नरेश अग्रवाल की ओर से रखा गया। उन्होंने समिति में होने वाले 15 सदस्यों के नाम भी गिनवा दिए। मगर भाजपा ने नियमों का हवाला देते हुए अग्रवाल के इस कदम का कड़ा विरोध किया कि मंत्री ही यह प्रस्ताव रख सकता है।

भाजपा सदस्यों ने सरकार पर लोकपाल पर खेल खेलने का आरोप लगाते हुए अपना रुख साफ करने को कहा। बाकी विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर कड़ा ऐतराज जताया तो अपना सिर बचाने का कोई चारा नहीं देख खुद ही सरकार को इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजने का ऐलान करना पड़ा। सेलेक्ट कमेटी संसद के अगले सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन अपनी रिपोर्ट देगी।

संसद का बजट सत्र खत्म होने के ठीक एक दिन पहले सरकार ने राज्यसभा में यह बिल पेश किया। कार्मिक एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री नारायणसामी ने बिल को पारित करने के लिए सभी दलों से सहयोग देने की अपील करते हुए कहा कि इसे लेकर विभिन्न दलों की आपत्तियों को मानते हुए दिक्कतें कम करने की कोशिश की गई है।

सरकार लोकपाल को लेकर प्रतिबद्ध है। बाद में नारायणसामी ने नरेश अग्रवाल के प्रस्ताव को हू-ब-हू सदन में पेश करते हुए बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव रख दिया। सभापति ने इस प्रस्ताव को तुरंत पारित कर दिया, जिसका सभी सदस्यों ने समर्थन किया।

लोकपाल को हटाने के प्रावधान
राज्यसभा में पेश संशोधित बिल में सरकार ने देश के किसी भी नागरिक द्वारा लोकपाल को हटाने की शिकायत के प्रावधान को हटा दिया है। नए प्रावधान के तहत अब सांसद या लोकपाल पैनल का प्रमुख ही लोकपाल को हटाने का कदम उठा सकता है। संशोधन के मुताबिक लोकपाल को हटाने के लिए 100 सांसदों के हस्ताक्षर वाली याचिका ही मंजूर की जाएगी। वहीं, लोकायुक्त का मामला राज्यों पर ही छोड़ने का फैसला किया गया है।
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